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व्यंग्य सदैव जनमुखी होता है : प्रदीप मिश्र


व्यंग्यधारा की 87 वीं ऑनलाइन वीडियो गोष्ठी का आयोजन

नागपुर। व्यंग्य सदैव जनमुखी होता है। व्यंग्य से ही तमाम राजनीतिक, सामाजिक सवालों के उत्तर मिलते हैं। यह विचार व्यंग्यकार प्रदीप मिश्र (सतना) ने व्यक्त किए। व्यंग्यधारा की 87वीं ऑनलाइन वीडियो गोष्ठी का आयोजन  ‘इस माह के प्रकाशित व्यंग्य’ श्रंृखला में किया गया। प्रमुख वक्ता वरिष्ठ व्यंग्यकार मधु आचार्य ‘आशावादी' (बीकानेर), प्रदीप मिश्र (सतना), व्यग्र पाण्डेय (गंगापुर सिटी) तथा प्रो. सेवाराम त्रिपाठी (रीवा) थे।    

मधु आचार्य ‘आशावादी' ने कहा कि कालजयी रचना वह है जो अपने समय के सच का सामना करती है।  उन्होंने संजीव शुक्ल के व्यंग्य ‘साहेब छोटेलाल और किसान’ और संतोष त्रिवेदी के व्यंग्य ‘महान बनने का अनोखा अवसर’ की समीक्षा की।
प्रो. सेवाराम त्रिपाठी ने कहा कि  व्यंग्य हमारे समय का प्रतिनिधित्व करता है। अनूपमणि त्रिपाठी के व्यंग्य ‘राजा का पराक्रम’ और राजशेखर चौबे के व्यंग्य ‘आई एम सॉरी’ को सार्थक व्यंग्य निरूपित किया। 

आरंभ में प्रखर व्यंग्य आलोचक व कार्यक्रम के संयोजक डा. रमेश तिवारी (दिल्ली) ने कहा कि व्यंग्यधारा समूह सदा व्यंग्य के विविध पक्षों पर नियमित रूप से आंतरिक और खुला विमर्श करता आया है। राजेंद्र वर्मा (लखनऊ), ब्रजेश कानूनगो (इंदौर), अल्का अग्रवाल सिग्तिया (मुंबई) ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन अभिजीत कुमार दुबे (अगरतला) ने किया। आभार टीकाराम साहू ‘आजाद’ (नागपुर) ने माना।                

वीडियो गोष्ठी में रमेश सैनी  ( जबलपुर ), वेदप्रकाश भारद्वाज (गाजियाबाद), सुनील जैन राही (दिल्ली), अनूप शुक्ल (शाहजहांपुर), प्रभात गोस्वामी (जयपुर), राजशेखर चौबे (रायपुर), चेतना भाटी (इ़ंदौर), हनुमान मुक्त (गंगापुर सिटी), कुमार सुरेश (भोपाल), अरुण अर्णव खरे (बेंगलुरु), वीना सिंह  (लखनऊ), रेणु देवपुरा (उदयपुर),  ललिता जोशी (दिल्ली), प्रभाशंकर उपाध्याय (सवाई माधोपुर),  मुकेश राठौर (भीकनगांव मप्र) तथा हनुमान प्रसाद मिश्र (अयोध्या) की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
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