Loading...

नाटक किसी भी भाषा को ज़िदा रखने का असरदार एवं आसान तरीका : अनिल भारद्वाज


नागपुर। राष्ट्रीय नाटय विद्यालय (National School of Drama), नई दिल्ली, भारतीय सिंधु सभा, नागपुर और थिएटर अस्तित्व, नागपुर द्वारा संयुक्त रूप से नागपुर में एक महिने का प्रोडक्शन ओरिएंटेड थिएटर वर्कशाॅप का आयोजन किया गया है। 


इस कार्यशाला में पूरे नागपुर से करीब 35 विद्यार्थी रंगमंच की बारीकियों का अध्ययन कर रहे हैं। वर्कशाप की कड़ी में बाबा हरदासराम गोदड़ीवाला धाम, जरीपटका, नागपुर में 'रंग विमर्श' विषय पर एक दिवसीय चर्चासत्र रखा गया जिसमें रंगमंच से संबंधित विषेशज्ञों द्वारा प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में इष्टदेव झूलेलाल एवं मां सरस्वती को पुष्पहार से वंदन किया गया। 

चर्चासत्र का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, सदर विभाग के संघचालक अनिल भारद्वाज ने ज्योति प्रज्ज्वलित कर किया। प्रसिद्ध नाट्य अभिनेता एवं निर्देशक तथा भारतीय सिंधू सभा, अमरावती के अध्यक्ष तुलसी सेतिया एवं प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक मोहन सचदेव विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। 

मंच पर सिंधुड़ी नाट्य संस्था के अध्यक्ष हरीश माईदासाणी, मराठी रंगमंच के प्रसिद्ध अभिनेता प्रभाकर अंबोणे, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के भाग कार्यकारिणी सदस्य निहार शर्मा, जादूगर प्रदीप वासनिक, गुरमुख मोटवाणी तथा बिलासपुर से पधारे सिंधी फिल्मों के गीतकार व संगीतकार राज केशवाणी उपस्थित थे। 

राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद, नई दिल्ली के पूर्व उपाध्यक्ष तथा भारतीय सिंधु सभा, नागपुर के अध्यक्ष घनश्याम कुकरेजा के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर के कैंप डाइरेक्टर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली के यशवंत निकोसे  तथा प्रशिक्षक किशोर लालवानी, सदस्य, सिंधी भाषा पर सलाहकार समिति, साहित्य अकादमी, नई दिल्ली एवं अभिनेता, निर्देशक (एच.के.नृत्य और कला) और  हनी खट्टर हैं. 

प्रस्तावना रखते हुए यशवंत निकोसे ने कहा कि यह पहला अवसर है कि रंगमंच के क्षेत्र में इस प्रकार का अल्पकालिक प्रशिक्षण नागपुर में हो रहा है। प्रभाकर अंबोणे ने रंगमंच की बारीकियों से प्रतिभागियों का परिचय करवाया। किशोर लालवाणी ने राष्ट्रप्रेमी क्रांतिसूर्य सावरकर जी का जीवन परिचय दिया। अनिल भारद्वाज ने प्रशिक्षण सत्र की प्रशंसा करते हुए कहा कि नाटक आवाज़ी संस्कृति का अंग है। यह एक परफार्मिंग आर्ट है। नाटक किसी भी भाषा को ज़िदा रखने का असरदार एवं आसान तरीका है। समय समय पर थिएटर वर्कशाॅप होते रहने चाहिये जिससे युवा पीढ़ी रंगमंच से जुड़े और अपनी भाषा एवं संस्कृति का विकास कर सके। 

प्रशिक्षण में भाग ले रहे सभी प्रतिभागियों ने पिछले एक सप्ताह में प्राप्त प्रशिक्षण तथा रंगमंच के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किये। प्रशिक्षण के समापन के अवसर पर प्रतिभागियों द्वारा तैयार किया गया नाटक ‘‘राष्ट्रप्रेमी क्रांतिसूर्य वीर सावरकर’’ पेश किया जाएगा जिसके लेखक किशोर लालवाणी तथा निर्देशक यशवंत निकोसे हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय नाट्î विद्यालय के विशेषज्ञ भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का संचालन तुलसी सेतिया ने किया तथा अतिथियों का अभार प्रदर्शन साक्षी कमल आर्य ने किया। 

कार्यक्रम के सफलतार्थ संजीव चोरडिया जैन, दिनेश श्रीवास, काजल आसूदानी, लहर केवलरामाणी, मोहित केसवाणी, पायल ठाकुर, भूपेश वानकर, प्रफुल धुर्वे, राम मधापुरे, अंकुश पुरी, लाजरी काळे, गीतिका ठाकुर, रक्षिता कस्तुरे, सौरभ जाधव, उज्वला पाटिल, आरोही मेश्राम, शशिकला मेश्राम, दिनकर मेश्राम, आनंद नंदेश्वर एवं राज पाटिल अथक प्रयास कर रहे हैं।
समाचार 7492508599093648830
मुख्यपृष्ठ item

ADS

Popular Posts

Random Posts

3/random/post-list

Flickr Photo

3/Sports/post-list