Loading...

भारत में चिकित्सा, इंजीनियरिंग परीक्षा में व्यापक बदलाव जरूरी


भारत के चिकित्सा शिक्षण के छात्र छात्राएं युक्रेन में फंसे 

यूक्रेन में भारत से सस्ती है चिकित्सा विज्ञान शिक्षा 

नागपुर (आनंदमनोहर जोशी)। जिस देश में शिक्षा के साधन हो वहां की जनता को अन्यत्र जगह पलायन नहीं करना पड़ता है। लेकिन भारत में अंग्रेजों के कानून, कठिन और जटिल नीट परीक्षा के साथ ज्यादा पढ़ाई की फीस होने से पिछले ६० - ७० साल से अमेरिका,इंग्लैंड, रूस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जर्मनी,फ्रांस जाना पड़ा। 

यूक्रेन,रूस भी ऐसे देश है। जहां मात्रा २० लाख में बिना किसी प्रवेश परीक्षा के ६ वर्ष चिकित्सा में स्नातक डिग्री मिल जाती है।अमेरिका जैसे देश में जहां वर्तमान समय में ५ से ६ करोड़ एम बी बी एस शिक्षण खर्च होता है। भारत जैसे देश में इस शिक्षा के लिए एम बी बी एस नीट परीक्षा देने के बाद उच्चांक लेने के बाद एक करोड़ के ऊपर खर्च आता है। 

इसे देखते हुए ही भारत के चिकित्सा शिक्षण के विद्यार्थी यूक्रेन जैसे देश में हजारों की संख्या में गए थे। इन विद्यार्थियों की संख्या १८ हजार के लगभग है। सम्पूर्ण भारत में एम बी बी एस की शिक्षा की ८४ हजार सीटें रहती है। भारत से शिक्षा लिए एम बी बी एस विद्यार्थियों को विश्व में अपना व्यवसाय करने की मान्यता नहीं है। वहीं यूक्रेन को विश्व स्वास्थ्य काउंसिल की तरफ से विदेशों में व्यापार, प्रैक्टिस करने की मान्यता है।

इस समय विश्व के देश में कसागिस्तान में २५ लाख ,यूक्रेन में २० लाख, भारत में ६० लाख से एक करोड़, ब्रिटेन, कनाडा,न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया में ४ करोड़, अमेरिका में ८ करोड़ में चिकित्सा एम बी बी एस शिक्षण खर्च होता है। साथ ही इंजीनियर की शिक्षा के लिए भी कठिन प्रवेश परीक्षा और भारी शिक्षण खर्च करीब पांच से छः लाख ४ साल में हो रहे हैं। शिक्षण खर्च में उचित राशि का प्रावधान हो। जिससे भारत के विद्यार्थियों का पलायन रोका जा सके।
समाचार 8350320816086875024
मुख्यपृष्ठ item

ADS

Popular Posts

Random Posts

3/random/post-list

Flickr Photo

3/Sports/post-list