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तब ही तिह रुद्र सरूप धर्यो जग जंत संघार कै जोग कर्यो


रुद्र रुप धारण कर शिवजी ने दैत्यों का संहार किया : ममतानी

नागपुर। श्री गुरु गोबिंदसिंघजी महाराज द्वारा रचित दसम ग्रंथ में चौबीस अवतारों का वर्णन है जो तखत श्री हजूर साहिब (नांदेड़) व हरमंदिर साहिब (पटना) तथा अन्य प्रमुख गुरुद्वारों में विराजमान हैं। दसम ग्रंथ में गुरुजी ने ग्यारवें अवतार के रुप में रुद्र अवतार अर्थात शिव अवतार का उल्लेख किया है। 

श्री कलगीधर सत्संग मंडल द्वारा शिवरात्री के उपलक्ष्य में आयोजित प्रवचन में संयोजक अधि. माधवदास ममतानी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को दसम ग्रंथ में से शिवजी के अवतरण के बारे में बताया कि जब धरती पाप के बोझ से दब उठी तब वह गाय का रुप धारण कर क्षीर समुद्र पर अकाल पुरख के सम्मुख रोते हुए पहुंची। 

पृथ्वी (धरती) के कष्टों को सुनकर अकाल पुरख मुस्कुराने लगे और उन्होंने विष्णु को अपने पास बुलाकर रुद्र का रुपधारण कर जगत के जीवों का संहार करने को कहा। तब विष्णु ने रुद्र रुप धारण कर जगत में जीवों का संहार कर योग की स्थापना की - 

'तब ही तिह रुद्र सरूप धर्यो जग जंत संघार कै जोग कर्यो'

अधि. ममतानी ने अपने जारी प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालुओं को बताया कि किस तरह शिवजी ने युद्ध किए और संतों को सुख प्रदान किया, पार्वतीजी को स्वयंवर में जीतकर उसका वरण किया, अंधकासुर से युद्ध किया और कामदेव के गर्व को चूर कर क्रोधित होकर दैत्यों के समूह का दलन कैसे किया इत्यादि प्रसंगो का वर्णन गुरुजी ने दसम ग्रंथ में किया है।

कार्यक्रम का आरंभ सुबह 6 बजे श्री जपुजी साहिब व श्री सुखमनी साहिब के सामूहिक पाठ के साथ हुआ। जिसमें कोविड नियमों का पालन कर नागपुर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुजनों ने शामिल होकर हर्षोल्लास के साथ महाशिवरात्रि का पर्व मनाया। कार्यक्रम का समापन आरती, अनंद साहिब, अरदास व प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

समाचार 962328412841289024
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