आधुनिक युग में बदल रहा चुनावी जश्न का तरिका
नागपुर (आनंदमनोहर जोशी) वर्तमान समय आधुनिक युग है। हाल ही में 5 राज्य में चुनावी जीत का जश्न अलग अलग तरीके से मनाया गया।पहले चुनाव के जीत के दौरान उम्मीदवारों को पुष्पहार, बुके पहनाए जाते थे।लेकिन हमारे देश ही नहीं दुनिया के देश में पुष्पहार,बुका, गुलदस्ता का चलन सुरक्षा के चलते कम होता जा रहा है। साथ ही वी ई पी की सुरक्षा में सावधानी बरती जा रही है। इस बार जीत के चुनाव ने दिखाया है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीत और चुनाव के बाद सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया है।उम्मीदवार के आसपास बॉडी गार्ड के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेताओं की तरह सुरक्षा के व्यापक प्रबन्ध भी किये गए।
इससे पूर्व उमीदवारों के पास ढेरों पत्रकार माइक के साथ हुआ करते थे।साथ ही फोटोग्राफर, वीडियो रिकार्डिंग भी करने के लिए 20 -25 फोटोग्राफर के आसपास झुण्ड रहता था। सुरक्षा कारणों के चलते भारत की राजनीती विष्वस्तरीय हो रही है।स्वतन्त्रता के पहले अंग्रजों ने भारतीय पत्रकारों पर पाबंदियां लगाई। 75 वर्ष तक भारत में पत्रकारिता को चौथा स्तम्भ कहा जाता रहा है। लेकिन आने वाले सालों में भारत की पत्रकारिता में ऑनलाइन का क्रेज भी काफी बढ़ गया है।
उत्तरप्रदेश में चुनावी जीत के बाद महिलाएं ढोल,बैंड पार्टी, बुलडोज़र पर सवार नेता,कार्यकर्ताओं का झुण्ड आकर्षण के केंद्र रहे। वहीँ चुनाव के दौरान पारम्परिक उत्तरभारतीय भोजपुरी गीत, संगीत, भांगड़ा नृत्य, होली फाग गीत की प्रस्तुति मनोज तिवारी और अन्य क्षेत्रीय कलाकारों ने दी। यही नहीं जीत के जश्न के दौरान अबीर,गुलाल,केशरिया,पीले रंग के साथ खुशियां मनाई गई। इस बार की चुनावी जीत के दौरान प्रदूषण वाले पटाखे, आतिशबाजी नहीं हुई।
मिठाइयों में भी मावा की मिठाई की जगह बूंदी बेसन के लड्डू ज्यादा बांटे गए। वहीं भारत में वर्तमान चुनाव में जातिवाद और भेदभाव का धीरे-धीरे अंत हो रहा है। भारतीय पत्रकारिता में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। पत्रकार के हाथों में कलम, पेन और पेड के स्थान पर मोबाइल,लैपटॉप दिख रहे है। साथ ही बड़े बड़े कैमरा के स्थान पर आधुनिक मोबाइल से ही छायंकन हो रहा है। पेपर के समाचार पत्र के जगह टी वी, मोबाइल पर तेजी से समाचार प्राप्ति होने से सबकुछ ऑनलाइन हो रहा है।
पहले जीतनेवाले उम्मीदवारों को बधाई देने लम्बी कतारें लगा करती थी। वर्तमान आधुनिक युग में इ मेल, मोबाइल मैसेज, ट्विटर हैंडल का अधिक उपयोग होने लगा है। वहीं महामारी के बाद चुनावी जीत के बाद रैली निकालने मे भी गिरावट आ रही है। चूँकि भारत में अधिकांश नागरिकों ने दो टीकाकरण की खुराकें ली है।यही वजह है कि चुनावी जीत पर कुछ जगहों पर बिना मास्क के जश्न मनाया गया।