श्री दसम ग्रंथ में रामअवतार का वर्णन : माधवदास ममतानी
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श्री कलगीधर सत्संग मंडल ने मनाया रामजन्मोत्सव
नागपुर। सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंदसिंघ जी ने दसम ग्रंथ की रचना की है जिसमें
श्री रामअवतार के साथ साथ अन्य 23 हिंदू अवतारों का वर्णन किया है। जिसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है, आमतौर पर लोगों को तुलसीकृत व वाल्मिकी रामायण की जानकारी है। यह दसम ग्रंथ नांदेड़ स्थित श्री सचखंड गुरुद्वारा, श्री माता साहिब, श्री पटना साहिब व नानकझीरा तथा अन्य प्रमुख गुरुद्वारों में विराजमान हैं। उक्त आशय जरीपटका स्थित श्री कलगीधर सत्संग मंडल द्वारा आयोजित श्रीराम जन्मोत्सव के अवसर पर अधि. माधवदास ममतानी ने उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को जानकारी दी।
अधि. माधवदास ममतानी ने अपने जारी प्रवचन में कहा कि श्री गुरु गोबिंदसिंघजी ने दसम ग्रंथ में अपने वंश की उत्पत्ति श्री रामचंद्र के वंश से बताई है। जिसका उल्लेख दसमग्रंथ में इस प्रकार लिखा है कि सूर्यवंश में राजा रघुजी हुए जिनसे रघुवंश चला। राजा रघु को पुत्र अज हुआ और अज का पुत्र दशरथ हुआ जिनके चार पुत्र राजा रामचंद्र, भरत, लक्ष्मण व शत्रुघन हुए। श्री रामचंद्र जी को दो पुत्र लव व कुश हुए। विभाजन में लव ने लाहौर शहर को राजधानी बनायी व कुश ने ‘कसूर’ शहर बसाया। कालांतर में कुश की संतानों ने काशी में आकर वेदों का गहन अध्ययन किया जिससे वे बेदी कहलाए।
इसी बेदी कुल में गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ ठीक उसी प्रकार श्री गुरु गोबिंदसिंघ जी लव की संतान है जिससे सोढी वंश चला, अतः श्री रामचंद्र जी हमारे गुरुओं के पूर्वज हैं इस बात का विस्तृत वर्णन दसम ग्रथ के पृष्ठ 47 से 54 तक है। अतः अधि. माधवदास ममतानी ने रामनवमी के इस पावन अवसर पर कहा कि श्री राम जी हमारे पूर्वज होने के कारण उनका मान-सम्मान करने का आव्ह्ान किया।
श्री गुरु गोबिंदसिंघ ने दसमग्रंथ में वर्णित रामकथा के सुनने व गाने वालों को वर दिया है कि जो भी इस कथा को सुनेगा व गाएगा उसके दुख एवं पाप निकट नहीं आएंगे तथा उसे सर्वप्रकार की बिमारी एवं जंतर मंत्र छू नहीं सकेंगे एवं वैष्णवभक्ति के फल की प्राप्ति होगी।
अपने जारी प्रवचन में अधि. माधवदास ममतानी ने राम नाम के महत्व को बताते हुए कहा कि पूरा श्री गुरु ग्रंथ साहिब श्री राम नाम की महिमा से भरा हुआ है तथा इसके अलावा भाई गुरदास जी अपनी वार में लिखते हैं कि श्री रामचंद्र जी का नाम सिमरन करने से तीन हत्याओं के पाप से मुक्ति पाता है। (वार 23 वीं, पउड़ी 8) कार्यक्रम के आरंभ में श्री जपुजी साहिब व श्री सुखमनी साहिब का पाठ उपस्थित हजारों की संख्या में श्रद्धालुजनों एवं विभिन्न रागियों द्वारा संयुक्त रूप में एक ही लय-सुर-ताल में प्रस्तुत किया। तत्पश्चात विभिन्न रागियों द्वारा कीर्तन प्रवचन व श्रीराम का जीवन चरित्र प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन आरती, अनंद साहिब, ग्यारह गुरुओं व दसम ग्रंथ में वर्णित मां भगवती की स्तुती, प्रार्थना व अरदास के साथ हुआ।
