'बेस्ट ऑफ राजेंद्र कुमार' से हुआ राजेंद्र कुमार के मधुर गीतों का सफर
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नागपुर। कभी सिल्वर जुबली फिल्म निर्माता रहे राजेंद्र कुमार को हिंदी सिनेमा में 'जुबली कुमारं' के नाम से जाना जाता था। राजेश खन्ना और देवानंद के बाद, हिंदी फिल्म उद्योग में सर्वश्रेष्ठ गीत राजेंद्र कुमार के पास गए। इन गानों की बेहतरीन परफॉर्मेंस रविवार को हार्मनी इवेंट्स द्वारा प्रस्तुत शो बेस्ट ऑफ राजेंद्र कुमारं से मिली।
राजेंद्र कुमार ने 1950 में जोगन के साथ अपनी फिल्म की शुरुआत की। 1957 में मदर इंडिया में उनके प्रदर्शन की प्रशंसा की गई। 1959 में 'गुंज उठी शाहनई' की सफलता के बाद उन्होंने मुख्य अभिनेता के रूप में अपना नाम बनाया। 60 के दशक में उन्हें काफी लोकप्रियता मिली, नाम प्राप्त हुआ। निवेदिका श्वेता शेलगांवकर ने इस रजत जयंती यात्रा का बेहतरीन प्रस्तुतीकरन किया। राजेश समर्थ द्वारा परिकल्पित कार्यक्रम की संयोजक स्वाति खडसे थीं।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ अविनाश श्रीखंडे द्वारा गाए गए गीतों से हुई, जिसका शीर्षक था 'कौन है जो सपने में आया'। बारिश की फुहारों की तरह गायको ने सुरीलाी गीतों का प्रदर्शन किया। "प्यार आँखों से जताया": अशफ़ाक़ शेख, "चलके तेरी आँखों से": विजय वावगे, "याद ना जाए": राजेश ढोबले, "हुस्ने जाना": दिनेश बावनकर, "हुस्नवाले तेरा जबाब नहीं": श्रीकांत सप्रे , "रिमझिम के गीत": डॉ अविनाश श्रीखंडे और वकील शर्मिला चार्लवार, "मुझे तेरी मोहब्बत का'। अशफाक शेख और रोशनी सावरकर, "हर दिल जो प्यार":
विजय वावगे और अंशु बूटी, "आजा तुझको पुकारे": राजेश ढोबले और अंशु बूटी, "मेरा प्यार भी तू है": दिनेश बावनकर और शर्मिला चार्लवार, गले ': श्रीकांत सप्रे और रोशनी सावरकर को दर्शकों ने सराहा। या शिवया चेहरे पे गिरी, मेरे महबूब तुझे, खुदा भी आसमासे, ये मेरा प्रेमपत्र पड़कर, तुम रूठी रहो, याद में तेरी जग, धीरे धीरे बोल, तेरी प्यारी प्यारी, एक फूलो नारगिस मस्ताना, गाने ने दर्शकों का दिल जीता।
