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महाराष्ट्र राज्य की प्राचीन परंपरा 'भातकुली' को किया साकार


नागपुर। ओमनगर सक्करधरा परिसर के परिवारों ने आज की युवा पीढ़ी और उनके बच्चों को पुरानी परंपरा, संस्कृति सभ्यता का ज्ञान हो और वो इस अति प्राचीन परंपरा से रूबरू होकर इस विलुप्त होती जा रही संस्कृति को बचाने स्वयं आगे आकर पहल करें तथा वो प्रकृति प्रर्यावरण का उचित ध्यान रखते हुए सम्मान करें और इसके साथ साथ जल्दी से जल्दी मानसून आते हुए मूसलाधार बारिश हो 


क्यूं कि विदर्भ में भीषण गर्मी से इंसान तो इंसान मूक प्राणी पक्षी भी तड़प तड़प कर दम तोड़ रहे हैं। कई गांव शहर सूखे की चपेट में आ गए हैं खेत खलिहान भीषण गर्मी और पानी की कमी से नष्ट हो रहे हैं फसलें बर्बाद हो गई हैं किसानों की आंखें पथरा गई हैं। चारों तरफ मानसून ना आने के कारण त्राहि त्राहि मची हुई हैं।
 

इस लिए आज 20 जून को नागपुर ओमनगर सक्करधरा वस्ती के जागरूक नागरिकों ने अति प्राचीन परंपरा 'भातकुली' को साकार किया। पूरे रिति रिवाजों से गुड्डा गुडिया की शादी करवाई, हनुमान मंदिर से गुड्डे की बारात निकाली गई और वस्ती में पूरे हर्षोल्लास से बरात घुमाई गई। फिर बड़े धूमधाम से गुड्डा गुड़िया की शादी मंत्रोच्चार से संपन्न कराई गई। गुड़िया दुल्हन का नाम पायल और गुड्डे वर का नाम प्रतीक रखा गया और अरविंदकुमार रतूड़ी एवं उनकी पत्नी सुनिता रतूड़ी ने वधू के मां बाप की रश्म और भूमिका तथा 


दिलीप कडू और उनकी पत्नी लता कडू ने वधु के मां बाप की भूमिका एवं रश्म निभाई। बरातियों की भूमिका और रश्म परिसर के आंमले परिवार, निंबाडकर परिवार, सोनबरसे परिवार, सुरे परिवार टिबोले परिवार, देशपांडे परिवार, उमाठे परिवार आदि ने निभाई, शादी के बाद शानदार भोज और नृत्य संगीत का भी आयोजन किया गया।
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