स्कूल ने अन्नाभाऊ साठे को किया याद
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नागपुर/सावनेर। स्थानीय अरविंद इंडो पब्लिक स्कूल में आज अन्नाभाऊ साठे की पुण्यतिथि मनाई गई । अन्ना भाऊ साठे एक क्रांतिकारी कवि, लेखक, नाटककार और समाज सुधारक थे।मराठी साहित्य और कला जगत के शिखर पुरुष अन्नाभाऊ साठे का जन्म 1 अगस्त 1920 को महाराष्ट्र के सांगली जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनका जन्म एक दलित परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम तुकाराम था ।दलित जाति के होने के कारण स्कूलों में उन्हें दाखिला नहीं मिल रहा था।
जब स्कूल में दाखिला मिला तो जाति - द्वेष के कारण उन्हें अपमानित किया जाता था। अपमान और तिरस्कार भरे माहौल के कारण उन्होंने स्कूल ही छोड़ दिया। 11 वर्ष के थे जब मुंबई पहुंचे। उनका बचपन बहुत ही संघर्षमय था। उन्होंने फिल्मी पोस्टरों और दुकानों के आगे लगे होर्डिंग्स से पढ़ना लिखना सीखा था। अन्नाभाऊ साठे एक अच्छे वक्ता भी थे जब बोलेने के लिए खड़े होते तो बड़ी से बड़ी भीड़ में भी सन्नाटा छा जाता था। अन्ना भाऊ साठे की रचनाओं पर आधारित 12 फिल्में बनी जो सफल मानी जाती हैं। निरंतर संघर्षमय जीवन जीते हुए अन्नाभाऊ साठे ने 14 लोक नाटक 35 उपन्यास 300 से ऊपर कहानियां लिखी। 'मेरी रूस यात्रा' का दलित साहित्य को पहला वृतांत होने का गौरव प्राप्त हुआ।
उनके उपन्यासों और नाटकों की देश विदेश में खूब चर्चा हुई। 1959 में प्रकाशित फकीरा उपन्यास को खूब प्रसिद्धि मिली। इसे उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को समर्पित किया था। इस उपन्यास में फकीरा नाम के मातंग जाति के क्रांतिकारी की शौर्यकथा का वर्णन है। 27 देशी विदेशी भाषाओं में उसका अनुवाद हुआ। 1 अगस्त 2002 को भारत सरकार ने उनके 82 वें जन्मदिन पर डाक टिकट जारी किया। स्कूली विद्यार्थियों ने उनके रेखाचित्र तैयार किए, अनुच्छेद लिखे। स्कूल के प्राचार्य राजेंद्र मिश्रा सर ने सभी विद्यार्थियों की सराहना की। अरविंद बाबू देशमुख प्रतिष्ठान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. आशीष देशमुख ने स्कूल के उपक्रम की सराहना की।
