श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति प्रशासन व प्रबंधन में अग्रक्रम पर : प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन शेख
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नागपुर/इंदौर। देशभर में हिंदी के प्रचार-प्रसार व विकास कार्य में रत विभिन्न स्वैच्छिक हिंदी संस्थानों में इंदौर, मध्य प्रदेश की श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति अपने प्रशासन,प्रबंधन, प्रशासन व लगन में निसंदेह अग्रक्रम पर है। इस आशय का प्रतिपादन विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज,उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष तथा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के परम अनुयायी आचार्य विनोबा भावे जी की सद्प्रेरणा से स्थापित नागरी लिपि परिषद, गांधी स्मारक निधि, राजघाट, नई दिल्ली के कार्याध्यक्ष प्राचार्य डॉ.शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने किया। श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति, रवींद्रनाथ टैगोर मार्ग, इंदौर में बृहस्पतिवार 15 फरवरी, 2024 को आयोजित एक विशेष स्वागत समारोह में डॉ.शहाबुद्दीन शेख बोल रहे थे।
डॉ. शेख ने आगे कहा कि, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के प्रेरणा से 29 जुलाई 1910 को स्थापित श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति, इंदौर का अपना गौरवशाली इतिहास है। 114 वर्षों की दीर्घ अवधि में समिति ने अपनी ऐतिहासिक परंपरा को अक्षुण्ण रखा है। समिति की मासिक पत्रिका 'वीणा' 82 वर्षों से नियमित प्रकाशित हो रही है। समिति द्वारा स्थापित डॉ. परमेश्वर दत्त शर्मा शोध संस्थान शोधार्थियों की दृष्टि से मार्गदर्शन पर शोध केंद्र है। समिति के पास सर्वाधिक समृद्ध अपना पुस्तकालय है,जो अनुपम है। इस पुस्तकालय में 22000 ग्रंथ उपलब्ध हैं। समस्त अत्याधुनिक सुविधाएं पुस्तकालय में उपलब्ध हैं। समिति के भवन सहित पुस्तकालय अपनी स्वच्छता एवं निर्मलता की दृष्टि से अत्यंत प्रशंसनीय है।पुस्तकालय की व्यवस्था अत्यधिक उत्तम एवं प्रभावशाली है।
प्रारंभ में मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति के प्रबंध मंत्री अधिवक्ता घनश्याम यादव तथा समिति के प्रचार मंत्री एवं हिंदी परिवार, इंदौर के संस्थापक - अध्यक्ष श्री हरेराम बाजपेयी द्वारा माल्यार्पण से डॉ. शहाबुद्दीन शेख का स्वागत किया गया। तत्पश्चात् हिंदी परिवार के उपाध्यक्ष प्रदीप नवीन तथा हरेराम बाजपेयी द्वारा अपनी कृतियां भेंटकर अभिनंदन किया गया। ‘वीणा’पत्रिका के संपादक श्री राकेश शर्मा ने ‘वीणा’ की नवीनतम प्रति एवं वार्षिक कैलेंडर प्रदान किया। इस अवसर पर समिति के कार्यालय अधीक्षक छोटेलाल भारती और कमलेश पांडे की गरिमामय उपस्थिति रही। अंत में प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख ने यह भी कहा कि समिति द्वारा किये गये स्वागत के लिए मैं समिति का आजीवन ऋणी रहूंगा।
