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हिंदी महिला समिति में गंभीर विषय पर परिचर्चा आयोजित


नागपुर। 'बिन फेरे हम तेरे' आज के इस आधुनिक दौर में समाज इस समस्याग्रस्त* बीमारी से ग्रस्त है.. लिव - इन - रिलेशनशिप का नशा आम हो गया है, नागपुर शहर की अग्रणी, प्रतिष्ठित, संस्था हिंदी महिला समिती ने एक बेहद संवेदनशील विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया।संसमिति की अध्यक्षा रति चौबे की अध्यक्षता में जागरुक महिलाओं ने अपने विचार रखे। 

- गीतू शर्मा कहती हैं कि बिन फेरे हम तेरे, यानि कि लिव इन रिलेशनशिप यानि कि युवा लड़के, लड़कियों का बिना विवाह किए अपनी मर्जी से साथ साथ रहना। इस नवीन पद्धति ने विवाह जैसी पवित्र संस्कार की धज्जियां उड़ा कर रख दी है। इसके पक्ष में युवा पीढ़ी ये दलील देती है कि बिना विवाह साथ रह कर हम एक दूसरे को अच्छी तरह समझ पाएंगे।कि हमारी कमियां और खूबियां क्या है। हम आगे एक दूसरे के साथ निभा सकते हैं तो विवाह भी कर लेंगे नहीं तो आपसी समझ से रिश्ता खत्म कर एक दूसरे से अलग हो जायेंगे। ये सब चीजें सुनने में भले ही ठीक लगे पर ये स्थिति सामाजिक विकृति को जन्म देती है। एक दूसरे के देखा देखी और भी लोग इसकी ओर आकर्षित होते थे  उसके नजरिए,उसकी आदतों के बारे में पता चल जाता है और हम ये निर्णय लेने को स्वतंत्र होते है कि हम विवाह करे या न करे।

- विमलेश चतुर्वेदी ने जयपुर से अपने विचार कुछ इस तरह दिये कि हमारी संस्कृति संस्कारों के कारण ही विश्व में जानी जाती है पर अबविदेशों व घर से बाहर जाकर उनकी सोच में सही मे तुच्छता आ गई है, पाश्चात्य सभ्यता का जामा ओढ़ गलत राह पे जा रहे सामाजिक संस्थानों को इस पे अकुंश लगाना चाहिये। - ममता विश्वकर्मा नागपुर  से जो खुद काफी सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी है ने कहा कि इस नवीन पद्धति ने तो वाह संस्कारों की धज्जियां ही उढ़ा दी है, साथ रिश्तों मे रहकर वो गौरव समझती है परिणाम पर तो सोचे 'बिनफेरे हम तेरे' को तो क्या निभाएगी यह अबकी पीढ़ी पहले विवाह का अर्थ तो जाने दुख  होता है सोच पर। 

- सुरेखा सिद्धी नागपुर की लेखिका ने भी बड़ा तीखा सा व्यंग आज के इन नौजवानों पे कसा कि उम्र के एक पड़ाव पर इनका यह कृत इनको ही इतना कचोटेगा कि सांस लेना भी इन्हें मुश्किल हो जावेगा, खुद को भी माफ ना करेगे जब इनके बच्चे इनको ना जानेंगे जब वृद्धि होती पाप की, कुल की बिगड़ी नारियां, हे कृष्ण फलती फूलती तब वर्ण शंकर क्यारियां। 

- निवेदिता पाटनी भोपाल से इस परिचर्चा में शामिल थी उनके विचार भी बिन फेरे हम तेरे लिव इन रिलेशनशिप  के विरोधी ही रहे वो कहती है कि नारी को समाज में बराबरी का दर्जा इसलिये नही दिया कि वो नारी सशक्तिकरण और अपनी आजादी का अनुचित फायदा ले उसका दुरूपयोग करे और रीति रिवाजों को छोड़ लिव- इन रिलेशनशिप में रहने लगे, यहअवसाद को जन्म देते हैं, और पतन की ओर बढ़ रहे हैं, इस ओर सरकार व परिवार को शीघ्र ध्यान देना चाहिये यह तो मानव समाज को कलंकित करना है जो पक्ष में हो उनका तो बहिष्कार  ही करना उचित है। 

- भगवती पंत ने विषय की गंभीरता को मद्देनजर रखते हुए कहा कि हमारे वेद व शास्त्रों में  नारी को देवी स्वरूप मानते हुए  कहा गया है यस्तु नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता। यह उपमा नारी को  यूं ही नही देदी गयी है । नारी  के त्याग, धैर्य, संयम, कर्तव्य परायणता, ममता व दया आदि जैसे गुणों से विभूषित होने के कारण ही उसे यह उपाधि मिली है। ये गुण रूपी आभूषण भी धीरे धीरे उतरते चले गये । आज परिवार के प्रति समर्पण की भावना के  स्थान पर उसे पर पुरुषों के साथ रहने में भी कोई आपत्ति नहीं होती। ब्याह के नाम से दूर भागने वाली अविवाहित लड़कियां 'बिन फेरे हम तेरे' की भावना लेकर आज किसी अन्य पुरुष के साथ रहने में खुशी महसूस रहती हैं, में कभी कर रही है कि अमुक व्यक्ति आगामी समय में उसके  जीवन साथी के रूप में उपयुक्त  है या नहीं। लड़कियों का जीवन धीरे धीरे निराशा में बदल जाता है  संस्कारों से पल्लवित  करना होगा तभी समाज में सुधार संभव होगा। संस्था की विदुषी सखी 

- कविता परिहार ने इस दिल दहला देने वाले विषय पर कहा कि बिन फेरे हम तेरे का विषय बहुत ही विचारणीय है? हम किसी से कम नहीं इस आधुनिकता की दौड़ में बिना कुछ सोचे समझे इंसान दौड़े जा रहा है।पहले गर्ल्स  स्कूल  कालेज अलग- अलग हुआ करते थे।इसलिए  लड़के  लडकियो  मे दोस्ती की संभावना नही के बराबर  ही होती थी।और माता पिता भी बच्चो पर विशेष ध्यान देते थे बच्चे  समय से घर आए कि नही। किंतु आज के मोबाइल युग में मां- बाप का ध्यान हटा कि बच्चे इन चक्करों में अपना जीवन खराब कर रहे हैं। सचिव रश्मि मिश्रा ने इस  विषय पर कहा कि यह एक सामाजिक बुराई है जिसे जड़ से समाप्त करना हम सबका दायित्व है।सभी का आभार व्यक्त करते हुए परिचर्चा समाप्ति की घोषणा की।
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