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बच्चों का 'उभरते सितारे' कार्यक्रम प्रेरणास्त्रोत है : मंगला सुरंगळीकर


उभरते सितारे मे 'भक्ति धारा'

नागपुर। कौन कितना निष्ठावान है, लोग यह भावों से पहचान लेते हैं।
आत्म गौरव से भरे इंसान ही, हमेशा दूसरों को सम्मान देते हैं।।

देश के प्रति मेरी सेवाओं के लिए आपने जो मुझे सम्मानित किया है, उसके के लिए मैं विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के उभरते सितारे इस उपक्रम की आभारी हूं। आज का उभरते सितारे बच्चों का यह कार्यक्रम मेरे लिए एक प्रेरणास्त्रोत है। हमारे दिल में हमेशा एक दूसरे की परवाह होनी चाहिए। ताकि हमेशा हम प्रेरित रहे। और, यह सद्भाव बना रहे की, एक इंसान दूसरे इंसान के हमेशा काम आए। यह विचार श्रीमती मंगला सुरंगळीकर ने बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच रखा।


विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन का नवोदित प्रतिभाओं को समर्पित उपक्रम 'उभरते सितारे' का आयोजन हिंदी मोर भवन के उत्कर्ष हॉल में किया गया। कार्यक्रम का विषय 'भक्ति धारा' पर आधारित भावपूर्ण और संगीतमय प्रस्तुतियों से भरा रहा। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप मे सीआरपीएफ से सेवानिवृत सूबेदार मेजर मंगला सुरंगळीकर उपस्थित थीं। इनका सम्मान संयोजक युवराज चौधरी ने स्मृति चिन्ह देकर किया। शुरुआत में  कार्यक्रम की प्रस्तावना मुख्याध्यापक और सहयोगी प्रशांत शंभरकर ने रखी। जिसमें उन्होंने एक भक्ति गीत के साथ अपनी बात कही।

 

तत्पश्चात, रितिक्षा चिवंडे के सुंदर नृत्य ने सबका मन मोह लिया। कोयल गेहानी, पवन मेश्राम और त्रिशिका वाघमारे ने बेहतरीन गीत सुनाए। बच्चों की प्रस्तुतियों को उनके अभिभावकों के साथ-साथ रंजीता वाघमारे, मीनाक्षी केसरवानी, हेमा गेहानी, रश्मि गेहानी, राजेश वर्मा, नरेंद्र ढोले, चंद्र वर्मा और वैशाली मदारे आदि ने बहुत सराहा। कार्यक्रम मे प्रशांत शंभरकर ने सहयोग किया। कार्यक्रम का संचालन एवं, उपस्थित सभी दर्शकों, कलाकारों और बच्चों का आभार संयोजक युवराज चौधरी ने अपने शब्दों में व्यक्त किया ।
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