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प्रकृति व मानव सेवा में अहम का कोई स्थान नहीं है : नंदकिशोर चौधरी


नागपुर। विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन, हिंदी मोर भवन सीताबर्डी नागपुर में संयोजक श्री विजय कुमार तिवारी व सहसंयोजक हेमंत कुमार पांडे इनके नेतृत्व में दिनांक 25 अगस्त 2025 को चौपाल उपक्रम के अंतर्गत 'सेवा परमो धर्म' इस शीर्षक के अंतर्गत कार्यक्रम आयोजित किया गया। 
नारायण शक्ति फाउंडेशन की अध्यक्षा, श्रीमती प्रेमलता तिवारी ने सरस्वती वंदना की सुंदर प्रस्तुति के साथ चर्चा  सत्र का आरंभ किया।

इस कार्यक्रम में उपस्थित  सदस्यों ने अपने जीवन के अनुभव, उदाहरण व प्रसंग के माध्यम से चर्चा में भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नंदकिशोर चौधरी रिटायर्ड मैकेनिकल इंजीनियर जे एस डब्ल्यू प्राइवेट लिमिटेड, कलमेश्वर नागपुर व वरिष्ठ समाज सेवक व विशेष अतिथि श्रीमती मीनल देहाडराय, डायरेक्टर, एक्वाडस स्ट्रक्चरल कंसल्टेंट्स, प्राइवेट लिमिटेड उपस्थित थे।

कार्यक्रम के आरंभ संयोजक विजय तिवारी ने कार्यक्रम  का उद्देश्य व प्रस्तावना दी। डॉ. प्रेमलता तिवारी, प्रकाश गुरुवे, कृष्ण कुमार द्विवेदी, इन्होंने सम्मान चिन्ह देकर अतिथियों का स्वागत किया तत्पश्चात संयोजक ने कार्यक्रम की भूमिका बात कर सभी श्रोताओं का स्वागत किया।

डॉ. सौरभ शुक्ला ने अपने 20 वर्ष के समाज सेवा के अनुभव व उनके परिणाम और भविष्य में समाज सेवा की व्यापकता, उपयोगिता, व समाज सेवा किस प्रकार से राष्ट्र उन्नति के द्योतक हो सकती है, यह उन्होंने अपने व्यक्तव्य में बताया। साथ ही जिस सामाजिक सेवा संस्था के माध्यम से वे सेवा कार्य में निरंतर लगे रहते हैं, उसका विस्तार में विवरण किया।

धीरज दुबे ने अपने संक्षिप्त व्यक्तव्य में धर्म के अनुसार समाज सेवा के अनेक उदाहरण देकर, उन्होंने सभी मानव जाति को समाज सेवा में अपना योगदान देने की अपील की एडवोकेट जगत बाजपेई ने अपनी विशेष शैली में भारतीय इतिहास में प्रथम समाज सेवा से राष्ट्र का उत्थान प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए, आर्य चाणक्य से लेकर वर्तमान समय में जिन्होंने व्यापक तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर समाज सेवा करके राष्ट्र में व्यापक परिवर्तन लाया, उसके बारे में ऐतिहासिक उदाहरण देकर विस्तार से बताया।

सुभाष चंद्र उपाध्याय ने अपने विशेष व्यंग्यात्मक शैली में अनेक राजनीतिक उदाहरण देकर लोगों को बहुत हंसाया व माहौल को खुशनुमा बनाया। शत्रुघ्न तिवारी ने अपने दैनिक जीवन में जो भी अवसर उन्हें मिलता है, उसका भी पुरा लाभ उठाते हुए समाज सेवा में लगे रहते हैं, उसके उन्होंने अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए।
विजय सिंह परिहार ने आध्यात्मिक की यात्रा से आत्म चिंतन, मानव चरित्र में परिवर्तन, आत्म शुद्धता निर्मल स्वभाव से समाज सेवा की प्रेरणा, सफलता, प्रत्यक्ष सेवा कार्य  व उनके  परिणाम के बारे में  बेहतर प्रस्तुतीकरण किया।
विशेष अतिथि श्रीमती मीनल देहाडराय ने अपने व्यवसाय से जुड़े रहते हुए सूखाग्रता क्षेत्र में छोटे-छोटे बांध बनाकर जल संचय, जल संवर्धन व खेती में उनका उपयोग, वैसे ही शहरी व्यवस्था में शीतल पर जल उपलब्ध कराने, इसी प्रकार उन्होंने सेवा कर्मियों को अल्प बचत योजना से जोड़कर जो उन्होंने सेवा कार्य किया, और इस कार्य से उन्हें जो खुशी व संतोष मिला  उसके बारे में उन्होंने बहुत सुंदर तरीके से बताया। इसी प्रकार उन्होंने अपने सेवा कार्य के काल में विशेष योगदान देकर  उन्होंने वृक्षारोपण, वृक्ष संवर्धन किया व उसके लाभ के बारे में जानकारी दी।
मुख्य अतिथि नंदकिशोर चौधरी ने बताया की मानव सेवा का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए, कुछ बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने बताया की समाज के जिन लोगों का जीवन स्तर निम्न दर्जे का हो, उनके लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, वस्त्र, औषधि, अन्ना व निवार  पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराना व उन्हें कार्य दक्ष बनाकर स्वावलंबी बनाना, इस दिशा में कार्य करना चाहिए।

साथ ही वर्तमान में समाज के गरीब बच्चों के लिए जो संस्थाएं निशुल्क तांत्रिक, व्यवसायिक शिक्षा व प्रशिक्षण व सेवा का अवसर उपलब्ध करके देती है उनके बारे में विस्तार से बताया। कार्यक्रम के अंत में डॉ.  कृष्ण कुमार द्विवेदी ने आभार प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में सर्व इसी प्रकार सर्वश्री डॉक्टर बच्चू पांडे, वैभव शर्मा, धीरज हरिशंकर दुबे, सौरभ शुक्ला, प्रवीण तिवारी, रमेश मौदेकर, विजय सिंह, आर पी शुक्ला, सौरभ झा,लालजी दुबे, मालिया पांडे, लक्ष्मीनारायण केसकर, सचिन शुक्ला, हरविंदर सिंह गांधी व अन्य उपस्थित श्रोताओं ने अपना अमूल्य योगदान दिया
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