हेमू कालानी के जीवन चरित्र को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए : दारा
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सिंधुड़ी यूथ विंग ने मनाया शहीद हेमू कालाणी का बलिदान दिवस
नागपुर। नगर के सिंधी कलाकारों की संस्था सिंधुड़ी यूथ विंग द्वारा वीर शिरोमणि नौजवान क्रांतिकारी शहीद हेमू कालाणी को उनके 83 वें बलिदान दिवस पर जरीपटका स्थित सिंधी सोशल फोरम के हाल में मनाया गया। सर्वप्रथम संस्था के पदाधिकारियों ने शहीद हेमू कालाणी के फोटो पर माल्यार्पण किया। सिंधी सोशल फोरम के अध्यक्ष पी.टी.दारा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सिंधी सोशल फोरम के महासचिव अशोक माखीजानी थे। वरिष्ठ निर्देशक हरीश माईदासानी तथा गुरमुख मोटवानी प्रमुख रुप से मंच पर उपस्थित थे।
इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी और लेखक किशोर लालवानी ने कहा कि सिंध प्रदेश का इतिहास गौरवशाली रहा है। सिंधू घाटी की सभ्यता विश्व की सभ्यताओं में सबसे प्राचीन और उच्च कोटि की सभ्यता मानी गई है। चार वेदों की जननी पवित्र सिंधु नदी के किनारे ही इस सभ्यता का जन्म हुआ। हमें गर्व है कि हम इस सभ्यता के वारिस है। जब जब भारतवर्ष पर मुसीबत आई है सिंध के युवा देशहित के लिए अपनी जान न्यौछावर करने से पीछे नहीं हटे हैं। शहीद हेमू कालाणी इसकी मिसाल है।
वरिष्ठ निर्देशक हरीश माईदासानी ने जानकारी दी कि सिंधुड़ी यूथ विंग ने सिंध के बलिदानी व्यक्तित्व डाहिरसेन, अमर शहीद संत कंवरराम तथा शहीद हेमू कालाणी के जीवन पर आधारित किशोर लालवानी द्वारा लिखित एवं निर्माता निर्देशक तुलसी सेतिया द्वारा निर्देशित नाटकों के सिंधी में कई शो पेश किये हैं ताकि सभी को भारत के इतिहास की सही सही जानकारी मिल सके, खासकर हमारी युवा पीढ़ी को। सिंधी समाज ने बहुत ही कष्ट सहकर, मेहनत करके इस मुकाम को प्राप्त किया है। अब युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वे इस विरासत का संरक्षण करे। पी.टी.दारा ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में छोटी सी उम्र में बलिदान देने वाले बलिदानी हेमू कालानी के जीवन चरित्र को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
सिंधी सोशल फोरम के पूर्व अध्यक्ष परमानंद वीधाणी ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि आज ही के दिन याने 21 जनवरी 1943 को इस वीर को ब्रिटिश हुकूमत ने सिंध के जिला सख्खर में फांसी दी। हेमू कालाणी के बलिदान को दुनियां याद रखेगी।
इस अवसर पर हाल में ‘कलासागर’ द्वारा आयोजित बहुभाषी नाट्य महोत्सव में प्रस्तुत सिंधी नाटक ‘असीं स्वागत कंदा आहियूं’ के निर्देश तुलसी सेतिया तथा कलाकार दिनेश केवलरामानी, हरीश माईदासानी, पिंकी रामनाणी, ओमप्रकाश टहिल्याणी, चंदू गोपानी, परमानंद कुकरेजा तथा बाल रंगभूमि नागपुर द्वारा बहुभाषी बाल नाट्य महोत्सव में प्रस्तुत सिंधी बाल नाटक ‘देर आयद दुरुस्त आयद’ के निर्देशक गुरमुख मोटवाणी तथा कलाकार आशू तुलसानी,सुरक्षा चांदवानी, पवन चेलानी, हैप्पी मंशानी तथा चिराग वासवानी को उन संस्थाओं द्वारा प्रदत्त शील्ड एवं सर्टिफिकेट प्रदान किये गए। वरिष्ठ रंगकर्मी गुरमुख मोटवाणी ने आए हुए श्रोताओं का आभार माना।
