विधान भवन नागपुर में दो दिवसीय यूथ पार्लियामेंट
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संविधान के अनुच्छेद 105(3) पर गहन मंथन
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में युवाओं द्वारा संसदीय विशेषाधिकारों पर विचारोत्तेजक चर्चा
नागपुर। स्वराज यूथ पार्लियामेंट के तत्वावधान में 29 एवं 30 दिसंबर 2025 को विधान भवन, नागपुर में दो दिवसीय भव्य एवं बौद्धिक रूप से समृद्ध यूथ पार्लियामेंट का आयोजन किया गया। इस यूथ पार्लियामेंट में भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद 105(3) तथा उसमें निहित संसदीय विशेषाधिकारों पर विस्तृत चर्चा एवं विचार- विमर्श किया गया। लोकतंत्र, संसदीय विशेषाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं उत्तरदायित्व के आपसी संबंध इस चर्चा का केंद्रबिंदु रहे।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों के रूप में - भूषण धर्माधिकारी, पूर्व मुख्य न्यायाधीश, बॉम्बे हाईकोर्ट अधिवक्ता प्रशांत ठाकरे, वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ, नागपुर हाईकोर्ट की गरिमामयी उपस्थिति रही।
सत्ता पृथक्करण का सिद्धांत - लोकतंत्र की रीढ़ : संसदीय चर्चा सत्रों के दौरान यह प्रतिपादित किया गया कि भारतीय लोकतंत्र की नींव सत्ता पृथक्करण के सिद्धांत पर आधारित है। भारतीय संविधान शासन के तीन स्वतंत्र अंगों - न्यायपालिका, कार्यपालिका एवं विधायिका (संसद) - की व्यवस्था करता है।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण धर्माधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि ये तीनों अंग अपने-अपने क्षेत्राधिकार में स्वतंत्र, स्वायत्त एवं सार्वभौम हैं, और किसी भी अंग को दूसरे के अधिकार क्षेत्र में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन तीनों अंगों के बीच संतुलन एवं पारस्परिक सम्मान बना रहना ही एक सुदृढ़ लोकतंत्र की पहचान है।
इस यूथ पार्लियामेंट में विभिन्न विधि महाविद्यालयों के छात्रों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर संसदीय पद्धति के अनुरूप अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रश्नोत्तर, तथ्यपूर्ण भाषण एवं प्रतिवाद के माध्यम से चर्चा अत्यंत जीवंत रही। छात्रों की तैयारी एवं संविधान संबंधी समझ को देखकर उपस्थित मान्यवरों ने उनकी विशेष सराहना की।
अनुच्छेद 105(3) : संसदीय विशेषाधिकारों का स्वरूप भारतीय संविधान का अनुच्छेद 105(3) संसद सदस्यों को प्राप्त विशेषाधिकारों से संबंधित है। इस अनुच्छेद के अनुसार - संसद सदस्यों को सदन में व्यक्त किए गए विचारों के लिए न्यायालयीन कार्यवाही से संरक्षण प्राप्त होता है, संसद एवं उसकी समितियों को अपने कार्य संचालन हेतु आवश्यक विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, किंतु इन विशेषाधिकारों का प्रयोग लोकहित, संवैधानिक मूल्यों एवं नैतिकता की सीमाओं के भीतर होना अपेक्षित है।
विशेषाधिकार और उत्तरदायित्व के बीच संतुलन छात्रों ने अनुच्छेद 105 (3) के इतिहास, उद्देश्य, सीमाओं तथा संभावित दुरुपयोग पर गहन विचार प्रस्तुत किए। कुछ प्रतिभागियों ने संसदीय विशेषाधिकारों को लोकतंत्र की रक्षा का माध्यम बताया, वहीं कुछ ने न्यायिक निगरानी एवं उत्तरदायित्व की आवश्यकता पर बल दिया।
इस सत्र में संसदीय विशेषाधिकारों पर विस्तृत चर्चा के उपरांत संबंधित संसदीय विधेयक प्रस्तुत कर पारित किया गया।
सत्र के दौरान विधि महाविद्यालय के हर्ष घाटे एवं पृथ्वीराज सपकाळ ने स्पीकर की भूमिका निभाई। शासकीय विधि विशेषज्ञ कृष्णा डी. पारधी एवं वसंतकुमार चुटे ने मार्गदर्शन प्रदान किया।
युवाओं में संवैधानिक चेतना बढ़ाने वाला उपक्रम : मान्यवर वक्ताओं ने कहा कि ऐसे यूथ पार्लियामेंट के माध्यम से युवाओं में संविधान के प्रति सम्मान, लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ एवं उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है। भविष्य के विधि विशेषज्ञों, प्रशासकों एवं जनप्रतिनिधियों के निर्माण हेतु ऐसे आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं।
संसद के समापन पर प्रत्येक युवा सांसद को संविधान की प्रति भेंट की गई।
इस दो दिवसीय युवा संसद अधिवेशन का आयोजन स्वराज संगठन के संस्थापक अध्यक्ष वेदांत आदित्य योगेश पारधी के नेतृत्व में अमन भांडारकर, मनुकराज सिंह, अलक प्रज्ञा मोगला एवं अन्य सदस्यों द्वारा किया गया। इस सफल आयोजन के लिए सभी स्तरों से सराहना व्यक्त की गई।
