युगीन की आवश्यकता है राष्ट्रीय स्वाभिमान और एकीकरण : संजय अग्रवाल
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नागपुर। भारत का गौरवशाली अतीत रहा है। किन्तु अपनी विरासत का विस्मरण होने के कारण हम स्वयं की क्षमता और सामर्थ्य को भूल गए। स्वामी विवेकानन्द ने अमेरिका की धर्म परिषद में भारतीय ज्ञान को विश्व पटल पर पहुंचाया और सम्पूर्ण भारत में राष्ट्रीय चेतना का अलख जगाया। आज भी राष्ट्रीय स्वाभिमान का बोध युग की आवश्यकता है।
यह बात आयकर विभाग, नागपुर के आयुक्त संजय अग्रवाल ने कही। वे हिन्दी विभाग, राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में आयोजित 'हिन्दी से हमारी अपेक्षाएं और स्वामी विवेकानन्द का राष्ट्र -चिंतन' विषय पर आयोजित विशिष्ट व्याख्यान में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि हिन्दी की सामर्थ्य ही इसकी शक्ति है। हिन्दी राष्ट्रीय एकीकरण की भाषा है। इस दौरान मंच पर नागपुर की वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती इंदिरा किसलय और हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज पाण्डेय उपस्थित थे।
विशिष्ट अतिथि इंदिरा किसलय ने कहा कि हिन्दी का विस्तार हो रहा है। विज्ञान और तकनीक का भी विकास हो रहा है। ऐसे में हमें विरासत और तकनीक को साथ लेकर चलना होगा।
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी समावेशी भाषा है। हिन्दी की शब्द संपदा निरंतर बढ़ती ही जा रही है। राष्ट्रीय पटल पर उसकी स्वीकृति का यही मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने भारतीयों में आत्मचिंतन का भाव बोध विकसित किया।
कार्यक्रम में सत्येंद्र प्रसाद सिंह, अनिल मालोकर, अविनाश बागड़े, प्रकाश आचार्य, रविन्द्र मिश्र, मोहनजी, प्रा. जागृति सिंह, डॉ. सुमित सिंह, डॉ. कुंजनलाल लिल्लहारे, दामोदर द्विवेदी, आकांक्षा बंगार, ज्ञानेश्वर भेलकर विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. लखेश्वर चन्द्रवंशी ने किया और जागृति सिंह ने आभार व्यक्त किया।

