UGC कानुन सवर्णो की प्रतिभा का गला घोटने वाले काले कानुन का जाहिर निषेध
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नागपुर। करणी सेना व ब्राह्मण सेना व स्वर्ण समाज क्रिती समिति नागपुर द्वारा 28 जनवरी को संविधान चौक पर UGC कानून में हाल ही में किए गए संशोधन के खिलाफ है पुरे देश का स्वर्ण समाज इससे प्रभावित हुआ है जनवरी 2026 में लागू हुए 'विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026' (UGC Equity Regulations 2026) का देश भर में व्यापक विरोध हो रहा है।
इस विरोध के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
OBC को शामिल करने पर विवाद: नए नियमों में अब SC/ST के साथ-साथ OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) को भी जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है। सामान्य वर्ग के छात्रों और संगठनों का तर्क है कि इससे उनके खिलाफ भेदभाव बढ़ेगा।
दुरुपयोग और झूठी शिकायतों का डर: प्रदर्शनकारियों और याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नियमों में झूठी शिकायतों के खिलाफ दंड का कोई प्रावधान नहीं है। उन्हें डर है कि इन नियमों का उपयोग 'हथियार' के रूप में किया जा सकता है, जिससे निर्दोष छात्रों और शिक्षकों का करियर बर्बाद हो सकता है।
'रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन' (विपरीत भेदभाव) का आरोप: सामान्य वर्ग के छात्रों का मानना है कि ये नियम उन्हें पहले से ही 'दोषी' मान लेते हैं और उनके लिए कोई सुरक्षा कवच प्रदान नहीं करते हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) में नियम 3(c) को "मनमाना और असंवैधानिक" बताया गया है।
संस्थानों की स्वायत्तता पर खतरा: कुछ आलोचकों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह बिल उच्च शिक्षा में अत्यधिक केंद्रीकरण (Centralization) लाता है, जिससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता (Autonomy) खत्म हो सकती है।
कठोर दंड के प्रावधान: नए नियमों के तहत दोषी पाए जाने वाले संस्थानों की ग्रांट रोकी जा सकती है या उनकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है, जिसे लेकर शिक्षण संस्थानों में चिंता है।
राजनीतिक और सामाजिक ध्रुवीकरण: उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में स्वर्ण समाज और विभिन्न छात्र संगठनों ने इसके विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर #UGCRollback जैसे हैशटैग भी चल रहे हैं।
