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सरहद


बात हो रही सरहद से
आज हिंदुस्तान की,
दीवार बन सीमा पर जो
रक्षा कर रहे गुलिस्तान की l

हो कैसी भी मुश्किले
हम नहीं डर जाएंगे,
अपने प्यारे देश के खातिर
जान न्योछावर कर जाएंगे l

मरमिटेंगे हम तब
बात हो जब देश के
आन बान और शान की,
बात हो रही सरहद से
आज हिंदुस्तान की l

परिवार अब देश हमारा
देशभक्ति अब अपना नारा,
चाहे मौसम हो अब कैसा
सरहद का मौसम है प्यारा l

रहे तिरंगा सबसे ऊंचा
दुनिया को पैगाम हमारा,
तीनों सेना का दमखम ऐसा
गूंज चहुओर इनके कमान की l

बात हो रही सरहद से 
आज हिंदुस्तान की l
आंच आए जब देश पर
खून का कतरा कतरा बोलेगा,
बहन इससे ही तिलक करना
हर जवान अब बोलेगा l

सलाम करेंगे खुशी खुशी हम
बात हो जब जिंदगी के शाम की
बात हो रही सरहद से
आज हिंदुस्तान की ।

- विवेक असरानी
   नागपुर, महाराष्ट्र 
   8554993441
काव्य 6184618274191269637
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