वसंतोत्सव की परिचर्चा अभिनंदन मंच से सुंदर प्रस्तुति रही
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नागपुर। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के उपक्रम अभिनंदन मंच (ज्येष्ठ नागरिकों का सम्मान) के अंतर्गत कार्यक्रम 'वसंतोत्सव' की परिचर्चा की सुंदर प्रस्तुति रही। यह आयोजन हिंदी मोर भवन रानी झांसी चौक में किया गया। प्रमुख अतिथि मदन गोपाल वाजपेई जी यस टी अधिकार, नागपुर की मंच पर उपस्थिति रही।
अतिथियों का स्वागत, बच्चू पांडेय, विजय तिवारी डॉ कृष्ण कुमार द्विवेदी ने अंगवस्त्र स्मृति चिन्ह से किया। प्रमुख अथिति मदन गोपाल वाजपेई ने अपने उद्बोधन में माता सरस्वती ज्ञान की देवी है उनकी कृपा जिस व्यक्ति पर हो जाए उस व्यक्ति कल्याण होता है।
वर्ष में जितने भी शुभ कार्य की शुरुवात की जाती है वसंत पंचमी से ही प्रारंभ करते है। चंदवरदाई की मदद से मोहम्मद गोरी ने शब्द भेदी बाण भी वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर चलाया। होली के त्यौहार में प्रकृति का बड़ा योगदान है। होलिका दहन हिरण्याकश्यप का प्रसंग भी वसंत पंचमी से जुडा है । जीवन में वसंत आने पर ही जीवन वसंतमय हो जाता है।
कार्यक्रम के आयोजकों की प्रशंसा की और बधाई दी। सर्व प्रथम कार्यक्रम की शुरूआत बच्चू पांडेय ने कहा भारत ऋतुओं का देश है। बाग में जब रंग बिरंगी फूल आम के बौर और पलास के फूल खिले हो उस समय जो आनंद का अहसास होता है। गांव में फाग के गीत और ढोल मजीरे की धुन जब बजती है तब वसंतोत्सव होता है। हेमंत पांडेय ने कहा मथुरा की होली और बरसाने को होली को ही वसंत उत्सव कहा जाता है। प्रात: पक्षियों का कलरव और प्रकृति का आनंद रमणीय दृश्य से वसंत की बाहर आती है।
जगत वाचपेई ने अपने वक्तव्य में ऋतुओं का राजा वसंत ऋतु है। कासलीदास के काव्य और कुमार संभव का वसंत उत्सव का उल्लेख मिलता है। शिवजी की तपस्या को कामदेव को भस्म करने के लिए आम के बाग में छिप जाता है। कौए और कोयल की गुणों की विशेषता की ओर ध्यान आकर्षित कराया।
माया शर्मा ने वसंत ऋतु पर कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं से तालिया बटोरी। विजय तिवारी ने वसंत ऋतु के महत्व को बताया। कृष्णा कपूर ने वसंत की छवि निराली, सबके जीवन में आए खुशहाली। कविता प्रस्तुत की। धीरज दुबे ने वसंत ऋतु कैसे मनाए। डॉ बालकृष्ण महाजन ने वसंत ऋतु पर अपनी कविता के माध्यम से विचार प्रस्तुत किए। सुजाता दरवडे ने मराठी कवित प्रस्तुत की।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में नरेंद्र मिश्रा, संजय अग्रवाल,मुकुंद द्विवेदी, शत्रुघ्न तिवारी, रामपति चौबे, दिनेश बागड़ी, लक्ष्मी नारायण केशकर, विनायक चिंचालकर, कार्यक्रम के संयोजक संचालन डॉ कृष्ण कुमार द्विवेदी ने किया। आभार प्रदर्शन का दायित्व विजय तिवारी ने किया.