परीक्षार्थी नहीं, गुणवान विद्यार्थी बनें : प्रो. कोमल ठाकरे
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नेहरू विद्यालय और स्व. देवकीबाई बंग विद्यालय के दसवीं- बारहवीं के विद्यार्थियों का विदाई समारोह संपन्न
नागपुर/हिंगणा। शिक्षा मनुष्य की तीसरी आंख है और उसी से हमारे अस्तित्व का दर्शन होता है। शिक्षा से ही मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्माण होता है, लेकिन आज के दौर में सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद विद्यार्थियों में पढ़ने की रुचि कम हो रही है, यह चिंता का विषय है। आज का विद्यार्थी 'परीक्षार्थी' होता जा रहा है, लेकिन समाज में विचरते समय मनुष्य की पहचान उसकी अंकतालिका के अंकों से नहीं बल्कि उसके भीतर की गुणवत्ता से होती है। इसलिए विद्यार्थियों को केवल परीक्षार्थी न रहकर गुणवान बनना चाहिए, ऐसा प्रतिपादन प्रसिद्ध व्याख्याता प्रो. कोमल ठाकरे ने किया।
संत गमाजी महाराज शिक्षण संस्था द्वारा आयोजित नेहरू विद्यालय व कनिष्ठ महाविद्यालय और स्व. देवकीबाई बंग अंग्रेजी माध्यम विद्यालय व कनिष्ठ महाविद्यालय के दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों के विदाई समारोह में वे बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था की उपाध्यक्ष अरुणा बंग ने कि प्रमुखतसे प्राचार्य नितिन तुपेकर, मुख्याध्यापक शशिकांत मोहिते, प्रा.. कैलाश पांडे उपस्थित थे।
आगे बोलते हुए प्रो. ठाकरे ने कहा कि पुस्तकें मनुष्य की आंतरिक आवाज को जगाती हैं। पढ़ने से मनुष्य विनम्र होता है, क्योंकि ज्ञानी व्यक्ति हमेशा विनम्र होता है। आज मोबाइल का अत्यधिक उपयोग मस्तिष्क के लिए घातक साबित हो रहा है, उसका उपयोग केवल जरूरत और पढ़ाई के लिए ही किया जाना चाहिए। यदि मोबाइल का उपयोग केवल समय बिताने के लिए किया गया तो आगे पछताने की नौबत आएगी। परिश्रम में निरंतरता रखने पर ही जीवन में सफल हुआ जा सकता है, ऐसी बहुमूल्य सलाह उन्होंने विद्यार्थियों को दी।
इस अवसर पर दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों ने अपने स्कूली जीवन की यादों को ताजा किया, तो नौवीं और ग्यारहवीं के विद्यार्थियों ने अपने वरिष्ठ साथियों को विदाई दी। कार्यक्रम का प्रास्ताविक मुख्याध्यापक शशिकांत मोहिते ने किया, संचालन आनंद महाले ने किया और आभार ईशानी मित्रा ने माना। कार्यक्रम की सफलता के लिए स्कूल के शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों और विद्यार्थी प्रतिनिधियों ने परिश्रम किया।