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भूदान स्मृति विचार एवं सद्भावना यात्रा को मिल रहा प्रतिसाद


नागपुर। भूदान स्मृति विचार एवं सद्भावना यात्रा कान्हापुर से 9 बजे नारे लगाते हुए पंचायत भवन के सामने से विदा हुई। इस अवसर पर देवानंद भाई, पवनार के डॉ. अशोक हिउरे, अमरावती के सुभाष गुलहाने आदि उपस्थित थे। डोंगरगांव निरामय बहुउद्देशीय संस्था के प्रोजेक्ट ऑफिस में यात्रा पहुंची, जहां गांव की किशोर बालिकाओं और बच्चों ने स्वागत किया। हाल में बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। तत्पश्चात डॉ. रवींद्र क्षीरसागर ने आश्रम द्वारा आयोजित भूदान स्वर्ण स्मृति पदयात्रा का जिक्र करते हुए बताया कि किस प्रकार रमेश भइया का प्रवचन सुनने सारे लोग आए थे। उसके बाद आश्रम से रिश्ता जुड़ा, यहां भी काम शुरू हुआ। श्रीप्रकाश पांडा ने बताया कि उनका जुड़ाव निरामय से वर्ष 2003 में कैसे हुआ, जो कि 22 वर्षों से चल रहा है। फिर डॉ. उर्मिला क्षीरसागर ने कार्यकर्ताओं के सामने आनेवाली कठिनाइयों का जिक्र किया। जिसका निवारण अजय कुमार पांडे ने स्वामी विवेकानंद जी के जीवन में आने वाली कठिनाइयों का उदाहरण देकर समझाया। राजेंद्र यादव ने सिरोही का अभिक्रम, राकेश पांडे ने अपना शैक्षिक अनुभव बताया। 


जालंधर भाई ने सुंदर भजन सुनाकर मंत्रमुग्ध किया। इसी बीच कार्यकर्ता बहनों ने अपनी सामाजिक कठिनाइयों को साझा किया। कार्यकर्ता वर्षा ने अपना सुखद अनुभव बताया कि हम विद्यार्थी थे अब हम शिक्षिका हैं। सुश्री श्रद्धा सिंह जो सेवा इंटरनेशनल फेलोशिप में संस्था से जुड़कर काम करती है। अपना फैमिली बैकग्राउंड बताकर यह कहा कि हमने गांव से बाहर आकर पढ़ाई की है। निरामय से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला। उसके बाद यात्रा माधवनगर आई जहां विशिष्ट प्रकार के भाई बहनों की सेवा चलती है। जिसमें हर तरीके से उनका जीवन कैसे अच्छा बने। उसके तमाम प्रयोग देखे। उन लोगों की उर्मिला बहन से खूब दोस्ती जैसी है। एक भाई और बहन ने  गाना भी सुनाया। भोजन के लिए कैफे में सब लोग गए। सुंदर व्रत का भोजन पाया। उसके बाद मनीष नगर में गोकुल केयर सेंटर बनाया है। उसे देखने गए, वहां भी अनेक बुजुर्ग माता पिता मिले जिनकी सेवा का काम श्रीप्रकाशजी की धर्मपत्नी शालिनी बहन जो मूलतः हरियाणा की हैं उनकी टीम करती है। शालिनी फोन पर भी लोगों की सेवा हेतु नर्स सेवक उपलब्ध कराती है। सेवा के लिए बड़ी टीम रखी हुई है। श्री प्रकाश के पिता जी बहुत बड़े वैद्य हैं। आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण करने हैं वे भी मूलतः रायबरेली उत्तरप्रदेश से हैं, मां अत्यंत शालीन और सेवाभावी हैं। 

वहां से विदा लेकर सर्वोदय आश्रम में यात्रा पहुंची। जिसके भवन का उद्घाटन 1998 भूदान जयंती पर हुआ था। आर के पाटिल नागपुर के ही थे, उनके प्रयास से यहां सेंटर गतिमान हुआ। यहां प्रवेश करते ही सर्व प्रथम परिसर में गांधी विनोबा जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। यात्रा टोली का स्वागत संजय भाई, राजेश भाई आदि ने किया। विचार रखने की श्रृंखला की शुरुआत अजय पांडे ने करते हुए भूदान की गंगोत्री की चर्चा की। विमला बहन ने स्वर्ण जयंती की यात्रा के समय भी यह पड़ाव रहा था। संजय भाई ने इन यात्राओं का नई पीढ़ी पर कैसे असर होता है सभी को बताया। सर्वोदय आश्रम के सचिव वंदन गडकरी ने सभी का स्वागत संबोधन किया। पूर्व आयुक्त आयकर धनंजय धार्मिक और नागपुर यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति डॉ. कमल दहिया बहन ने आशीर्वाद दिया। अंत में रमेश भईया ने सभी अतिथियों और जीवन केलकर श्रीप्रकाश जी को भूदान स्वाध्याय पुस्तक भेंट की। अंत में अजय पांडे और संजय राय को विदाई दी। उन्हें गाड़ी पर बिठाने की जिम्मेदारी प्रकाश भाई ने ली। 

डॉ. अनिल बाघ करनाटक और राजीव देशपांडे औरंगाबाद होने से नहीं मिल सके। लेकिन अरुण भाई और डॉ. बाघ के भतीजे ने बहुत सुंदर कार्यक्रम की व्यवस्था की। वे लोग भी दूरभाष से निरंतर जुड़े रहे, उसके बाद यात्रा टोली आमदार होस्टल आई जहां आज सबके व्रत का प्रसाद लिया और रात्रि विश्राम किया। आज यात्रा टोली को भंडारा के लिए निकलना है। 9 बजे जीवन केलकर जो पवनार आश्रम में हर वर्ष मित्र मिलन में जाते हैं।उनके आवास पर यात्रा टोली पहुंचकर नाम माला एकादश व्रत आदि करके भंडारा के लिए प्रस्थान करेगी और यहीं से विमला बहन और के पी भाई को आज जी टी एक्सप्रेस पर जीवन भाई केलकर बिठालेंगे। मथुरा में उन्हें पंकज भाई मिलेंगे जो विनोबा आश्रम पहुंचाएंगे। भंडारा में मोरेश्वर जी, चक्रधर जी का आतिथ्य स्वीकार करते हुए शाम को कविता बहन के सौजन्य से श्री नानाजी महाराज सेवा आश्रम परसबाडा में शाम का पड़ाव रहेगा।
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