रूदन नहीं हुंकार चाहिए
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माफी नहीं बलिदान चाहिए
महिषासुर की दुनिया में इस
काली की ललंकार चाहिए ।
दुर्गा चंडी ज्वाला हो तुम
संस्कारों की माला हो तुम
जब२ तुम पर हो प्रहार या अत्याचार
तो बन कटारी दुश्मनों की
नाशिनी विध्वंसकारी हो तुम।
पद्मावत का जौहर हो तुम
लक्ष्मी बाई का स्वाभिमान तुम
जब२ अस्तित्व पर उठे सवाल तो
धड़कती आग बवंडर हो तुम।
कमजोर समझ तुम नारी को
भूल गए हो क्या काली को
जब२ अत्याचार पर क्रोध हो भारी
जल जाती है पृथ्वी सारी।
अबला नहीं हो सबला हो तुम
त्याग प्रेम लाज ममंता रूप में नारी हो तुम
अपने स्वाभिमान पर आंच ना आने देना
अत्याचारियों के लिए विनाशकारी हो तुम।
- मेघा अग्रवाल
नागपुर, महाराष्ट्र