मनाया गया ‘सिंधी भाषा दिवस’
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बोली के रक्षार्थ लिया संकल्प
नागपुर। नगर के सिंधी कलाकारों तथा लेखकों की ओर से ‘‘सिंधी भाषा दिवस’’ के अवसर पर धर्मदास दरबार, चैधरी चैक, जरीपटका, नागपुर में 10 अप्रेल 2026 को ‘सिंधी भाषा दिवस’ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए सुंदर कला संगम के अध्यक्ष किशन आसूदानी ने सिंधी भाषा दिवस के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि 10 अप्रेल 1967 को सिंधी भाषा को 15 वीं भाषा के रूप में संविधान में मान्यता मिली। जिस तरह हम दूसरे त्यौहार मनाते हैं उसी तरह अपनी भाषा दिवस को भी प्रधानता देनी चाहिये।
कार्यक्रम के अध्यक्ष साधना सहकारी बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष, घनश्याम कुकरेजा थे। विशेष अतिथि ज्येष्ठ मित्र मंडल के अध्यक्ष अर्जुनदासज आहूजा, भाजपा व्यापारी आघाड़ी महाराष्ट्र के अध्यक्ष वीरेंद्र कुकरेजा, साधना सहकारी बैंक लिमिटेड,नागपुर के डाइरेक्टर एडवोकेट विनोद लालवाणी, महाराष्ट्र हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व सदस्य एवं साहित्यकार अविनाश बागड़े, नगरसेविका प्रमिला मथरानी तथा सिंधुड़ी यूथ विंग, नागपुर के अध्यक्ष राकेश मोटवाणी थे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा इष्टदेव झूलेलाल, माता सरस्वती एवं श्री सुंदर बुटाणी की तस्वीर पर माल्यार्पण कर किया गया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए नागपुर के वरिष्ठ लेखक एवं नाटककार किशोर लालवानी ने कहा कि संविधान की आठवीं सूची में शामिल 22 भाषाओं में सिंधी भाषा अकेली ऐसी भाषा है जिसकी अरबी और देवनागरी दोनों लिपियों के साथ मिली।
घनश्याम कुकरेजा ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेई ने इस बिल के पक्ष में विचार रखते हुए कहा,‘‘भले ही मैं हिन्दी भाषा बोलता हूँ लेकिन मैं सिंधी भाषा का भी उतना ही सम्मान करता हूं जितना कि हिन्दी भाषा का। हिंदी मेरी मां है तो सिंधी मेरी मौसी है।’’ ज्येष्ठ मित्र मंडल के अध्यक्ष अर्जुनदास आहूजा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हमें युवाओं एवं बच्चों को सिंधी भाषा में शिक्षा देने का संकल्प लेना होगा तभी हम इस दिन की सार्थकता को सिद्ध कर सकते हैं।
मूर्धन्य हिंदी साहित्यकार अविनाश बागड़े ने अपनी कविता की कुद पंक्तियों द्वारा सिंधी भाषा की स्थिति बयां की -
सिंधी भाषा दिवस का, आज मनाए हर्ष। मगर न भूलें हम कभी, किया हुआ संघर्ष।।
कितनी ही कुर्बानियां,कितना किया विमर्श। तब जाकर हम आज ये,देख रहे उत्कर्ष।।
चल रहा है कारवां,आज संभाले फर्श। सिंधी भाषा कर सके, नीलगगन को स्पर्श।।
अशोक माखीजानी ने कहा कि यह दिन सिंधी समाज के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। अंकुर के अध्यक्ष हरभगवान नागपाल, नगरसेविका प्रमिला मथरानी, मीरा जारानी एवं राकेश मोटवानी ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर सुंदर कला संगम, संजीवनी, ज्येष्ठ मित्र मंडल, सिंधुड़ी यूथ विंग आदि संस्थाओं द्वारा भाजपा व्यापारी आघाड़ी महाराष्ट्र के अध्यक्ष वीरेंद्र कुकरेजा का सत्कार किया गया। घनश्याम कुकरेजा, वीरेंद्र कुकरेजा तथा किशन आसूदानी ने मिलकर हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व सदस्य एवं साहित्यकार अविनाश बागड़े का भी विशेष सत्कार किया।

