स्व. आशा भोसले संगीत प्रेमियों के दिल पे राज करती हैं : पं. रामऔतार शर्मा
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नागपुर। विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन, हिंदी मोर भवन, सीताबर्डी, नागपुर में उपक्रम चौपाल के अंतर्गत स्वर्गीय आशा भोसले को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करने संयोजक विजय तिवारी सहसंयोजक हेमंत कुमार पांडे के मार्गदर्शन में 'श्रृद्धांजलि' का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पं. रामऔतार शर्मा उपस्थित थे। चौपाल की परंपरा के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत विद्या की देवी, वीणा वादिनी, मां सरस्वती की वंदना के साथ की गई।
शुरुआत में नरेंद्र सिंह परिहार, डॉ. कृष्णकुमार द्विवेदी, (कवि), डॉ. बच्चू पांडे व पदमदेव दुबे ने मुख्य अतिथि का अंग वस्त्र व सम्मान चिन्ह के साथ स्वागत किया। चर्चा के आरंभ में श्रीमती भारती रावल ने जो की एक गायिका है आशाजी संगीत व गायन के शुरवात, संघर्ष व सफलता पर अनेक उदाहरण के साथ विस्तृत चर्चा की। अंत में उन्होंने एक गीत के साथ श्रद्धांजलि दी। वीरेंद्र सिंह परिहार, भारतीय सेवा के हिंदी अधिकारी हैं, उन्होंने गोवा में जिस शिव मंदिर में मंगेशकर बहने शिवजी को जल चढ़ाने जाती थी, वहां वातावरण, आध्यात्मिक अनुभव व शांत माहौल का बखान करते हुए अपने अनुभव साझा किए।
धीरज दुबे ने अपने अल्प सुनहरे वचनों से श्राद्ध सुमन अर्पित किए। मदन गोपाल बाजपेई, बिनांका गीत माला के गीतों की याद करते हुए अपने अनुभव साझा किए। डॉ. बच्चू पांडे ने भी आशाजी के विस्मृत पल, उनके जीवन में आए उतार चढ़ाव का वर्णन कर श्रद्धांजलि अर्पित किया। आदेश जैन ने जो की एक शानित प्रेमी है, आशा जी के विशेष गायन शैली का वर्णन करते हुए, श्रद्धांजलि अर्पित की।
लक्ष्मी नारायण केसर ने भी अपनी मधुर शब्दों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए। गायक समीर पठान ने आशाजी की गायन विशेषता बताकर उन्हें याद किया। ऐड. जगत बाजपेई ने आशाजी के जीवन के संघर्ष से लेकर सफलता और पद्मभूषण पुरस्कार के प्राप्ति की यात्रा तक का संपूर्ण विवरण देकर श्राद्ध सुमन अर्पित किए।
मुख्य अतिथि पंडित रामौतार शर्मा मनुष्य के जीवन के प्रारब्ध का वर्णन करते हुए, आशाजी के जीवन यात्रा को एक सफल, महान, राष्ट्रीय, विभूति बताते हुए श्राद्ध सुमन अर्पित किए। 'श्रद्धांजलि दीप' का संचालन संयोजक विजय तिवारी ने बहुत ही शोक संतृप्त मन से किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. कृष्णकुमार द्विवेदी ने मुख्य अतिथि, संयोजक, सहसंयोजक इसी प्रकार श्रोताओं और वक्ताओं का आशाजी के प्रति लगाव, संगीत प्रेम व उन्हें दिल में बढ़ाए रखने के लिए आभार प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में सह संयोजक, सर्वश्री हेमंत कुमार पांडे, शत्रुघ्न तिवारी, रमेश मौदेकर, डॉ सौरभ शुक्ला, वैभव शर्मा, सचिन शुक्ला, पद्मदेव दुबे, अशोक रावल, तेजवीर सिंह, ओमप्रकाश कहते, राम नारायण यादव, सर्वश्रीमती माया शर्मा, प्रीति पाटील, अंजू पांडे, इत्यादि ने अपना अमूल्य योगदान दिया।
