गलत बैठने-उठने की आदतें बढ़ा रही हैं कमर व गर्दन दर्द : डॉ. प्रवीण डबली
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नागपुर। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मंगलवार को द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) नागपुर केंद्र में शरीर की गलत स्थिति और उससे होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नर्व स्टीमूलेशन थेरेपिस्ट, योग थेरेपिस्ट एवं स्वास्थ्य प्रेरक वक्ता डॉ प्रवीण डबली ने उपस्थित लोगों को शरीर की सही स्थिति बनाए रखने के महत्व के बारे में विस्तार से डेमो के साथ सही जानकारी दी।
कार्यक्रम की प्रस्तावना व अतिथि का परिचय संस्था के अध्यक्ष डॉ संदीप श्रीखेडकर ने दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं और मोबाइल तथा कंप्यूटर का अत्यधिक उपयोग करते हैं। जिसके कारण शरीर की सही स्थिति पर ध्यान कम जाता है, जिससे स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर समाज में जागरूकता फैलाना की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
अपने भाषण में डॉ प्रवीण डबली ने बताया कि शरीर की गलत स्थिति आज कम उम्र में ही अनेक बीमारियों का कारण बन रही है। लगातार झुककर बैठना, मोबाइल देखते समय गर्दन नीचे रखना, गलत तरीके से नींद लेना या लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना शरीर की मांसपेशियों और नसों पर अनावश्यक दबाव डालता है। इसी के कारण गर्दन दर्द, कमर दर्द, रीढ़ की समस्या, सिरदर्द, थकान तथा पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
उन्होंने बताया कि एक अध्ययन के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत लोग अपने जीवन में कभी न कभी कमर दर्द का अनुभव करते हैं और इसका प्रमुख कारण शरीर की गलत स्थिति है।
डॉ डबली ने उपस्थित लोगों को बैठने, खड़े होने, चलने, वाहन चलाने और सोने की सही स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठते समय पीठ सीधी रखनी चाहिए, कमर कुर्सी से सटी होनी चाहिए और पैर जमीन पर सीधे रखे होने चाहिए। इसके साथ ही हर तीस से चालीस मिनट के बाद में थोड़ी देर उठकर चलना भी आवश्यक है।
उन्होंने सोने की सही आदतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बहुत ऊँचा तकिया और बहुत नरम गद्दा उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। मध्यम कड़क वाला गद्दा और पतला और नरम तकिया उपयोग करना गर्दन के हिसाब से बेहतर होता है तथा बाईं ओर करवट लेकर सोना शरीर के लिए अधिक लाभदायक होता है।
डॉ डबली ने जानकारी दी कि योग और नर्व स्टीमूलेशन थेरेपी से शरीर की स्थिति सुधारने में काफी सहायता मिलती है। जिसके लिए उन्होंने ताड़ासन, भुजंगासन, मकरासन और पवनमुक्तासन जैसे सरल योगाभ्यास करने की सलाह जरूरतमंदों को दी । ऐसा करने से रीढ़ की हड्डी लचीली रहती है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। जिसके कारण बीमारियां आसपास भी नहीं फटकती।
व्याख्यान के दौरान डॉ डबली ने उपस्थित लोगों को शरीर की स्थिति सुधारने के व्यावहारिक तरीके भी समझाकर बताए तथा गलत स्थिति को प्रदर्शित करके उसके दुष्परिणामों की।जानकारी दी । उन्होंने सभी श्रोताओं से आग्रह किया कि बिस्तर या सोफे पर लेटकर मोबाइल का उपयोग बिल्कुल भी न करें, क्योंकि इससे गर्दन पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और भविष्य में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
उन्होंने स्वस्थ जीवन के लिए जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर डॉ डबली ने श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर भी दिए और शरीर की स्थिति से संबंधित उनकी शंकाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम में संदीप श्रीखेडकर, जयंत जोशी, सतीश रायपुरे, श्रीकांत दोईफोडे, पी के कुलकर्णी, इंजीनियर भार्गव, विनोद संगीतराव , वामन पराते और रमेश दर्यापुरकर, उप आयकर आयुक्त संजय अग्रवाल, राजेंद्र चांदोरकर, संदीप अग्रवाल, पत्रकार अजय पांडे, वसंत पारधी, सौरभ सिंग, सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में संस्था के मानद सचिव जयंत जोशी ने डॉ प्रवीण डबली को गुलदस्ता और स्मृति चिन्ह देकर सत्कार किया।
