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ऐतिहासिक कुओं का संरक्षण समय की आवश्यकता : डॉ. प्रवीण डबली


नागपुर। वर्तमान में जमीन के पानी के स्तर को बढ़ाने के लिए हमे ऐतिहासिक कुओं के संरक्षण व उसके पुनर्भरण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होने का आवाहन जल योद्धा, पर्यावरणविद   वरिष्ठ पत्रकार डॉ प्रवीण डबली ने बंगलौर में आयोजित जल परिषद में किया। 

अपने संबोधन के दौरान नागपुर से पधारे वरिष्ठ पत्रकार एवं पर्यावरणविद् डॉ. प्रवीण डबली ने शहरी क्षेत्रों में बढ़ते जल संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐतिहासिक कुओं का संरक्षण और पुनर्जीवन आज समय की आवश्यकता बन गया है। उन्होंने कहा कि शहरों में कई पुराने कुएं उपेक्षा के कारण नष्ट हो रहे हैं, जबकि यदि उनका संरक्षण और पुनर्जीवन किया जाए तो वे जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपने-अपने क्षेत्रों में पुराने जल स्रोतों को बचाने और उनका संवर्धन करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहाँकि जिस क्षेत्र में सार्वजनिक कुएं है उनके संवर्धन की जिम्मेदारी स्थानीय नगरसेवक व सामाजिक संगठन को उठानी चाहिए। साथ ही उस कुएं के पानी का उपयोग कम से कम पेड़ो को पानी देने, बगीचों को पानी देने के लिए किया जाना चाहिए ताकि पानी की गुणवत्ता बनी रहे। 
आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर, बेंगलुरु के विशालाक्षी मंडप में आयोजित जल योद्धा सम्मान समारोह के दौरान जल और कृषि विषय पर दो महत्वपूर्ण पैनल चर्चाओं का आयोजन किया गया, जिसमें देश के वरिष्ठ विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने भाग लेकर जल प्रबंधन के विभिन्न आयामों पर विचार साझा किए।

पैनल चर्चा में वहां उपस्थित पद्मश्री उमाशंकर पांडे, पद्मश्री सेठपाल सिंग, पद्मश्री भारत भूषण त्यागी, पद्मश्री कमल सिंग चौहान, पद्मश्री पोपटराव पवार, पद्मश्री महान नागर, श्री श्री रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम ट्रस्ट तथा श्री श्री इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रसन्ना प्रभु ने भी मार्गदर्शन दिया। इस सत्र में भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव (वाटरशेड मैनेजमेंट) श्री नितिन खाड़े, आयकर आयुक्त डॉ. नितिन वाघमोडे, वेस्टर्न कोल्डफील्ड लिमिटेड के डॉ. हेमंत शरद पांडे और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सचिन कुमार वैश्या तथा सरकारीटेल डॉट कॉम के मुख्य संपादक अमेय साठे ने अपने विचार रखे।

दूसरे सत्र में पूर्व जल शक्ति मंत्रालय के निदेशक श्री गिरिराज गोयल, आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर डॉ. आशीष पांडे, व्हील्स ग्लोबल फाउंडेशन की इंडिया सीईओ सुजाता नरसिम्हन तथा वरिष्ठ होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. ए.के. गुप्ता ने जल प्रबंधन और कृषि के क्षेत्र में टिकाऊ उपायों पर चर्चा की।

वक्ताओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरचनाओं के विकास, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने और कम पानी में खेती करने की तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। सभी विशेषज्ञों ने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की जरूरत बताते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही भविष्य में जल संकट का समाधान संभव है।
समाचार 9159240080442864083
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