हिंगणा में करियर मार्गदर्शन मेळावा उत्साहपूर्वक संपन्न
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300 से अधिक विद्यार्थी- पालकों की सहभागिता
नागपुर/हिंगणा। बदलती वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए केवल डिग्री ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपनी रुचि पहचानकर तथा समयानुसार तकनीक को आत्मसात करते हुए करियर का चयन करना समय की आवश्यकता है, ऐसा संदेश हिंगणा में आयोजित करियर मार्गदर्शन कार्यक्रम में व्यक्त किया गया। स्थानीय कृषि उपज बाजार समिति, महाजनवाड़ी में यह कार्यक्रम उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में क्षेत्र की विभिन्न शालाओं एवं कनिष्ठ महाविद्यालयों के लगभग 300 विद्यार्थी एवं पालकों ने उपस्थित रहकर मार्गदर्शन का लाभ लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के कोषाध्यक्ष मा. महेशजी बंग ने की। प्रमुख मार्गदर्शक के रूप में नेशनल अकादमी ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन के प्राध्यापक डॉ. सुरेंद्र गोळे तथा प्रख्यात करियर मार्गदर्शक नितीन विघ्ने उपस्थित थे। मंच पर नेहरू महाविद्यालय के पूर्व मुख्याध्यापक शशिकांत मोहिते, स्व. देवकीबाई बंग इंग्लिश मीडियम हाईस्कूल एवं कनिष्ठ महाविद्यालय के प्राचार्य नितीन तुपेकर तथा नेहरू महाविद्यालय के मुख्याध्यापक दिनकर लखमापुरे मुख्य रूप से उपस्थित थे।
इस अवसर पर प्रमुख मार्गदर्शक के रूप में बोलते हुए डॉ. सुरेंद्र गोळे ने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन करते हुए करियर प्लानिंग में स्वयं को सिद्ध करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन निर्माण के दौरान केवल पुस्तक ज्ञान पर निर्भर न रहते हुए सर्वांगीण विकास पर ध्यान देना आवश्यक है। उत्तम व्यक्तित्व का निर्माण आज के समय की बड़ी आवश्यकता है। जो व्यक्ति संवेदनशील होने के साथ बुद्धि से कार्य करता है, वही वास्तविक रूप से समाज में टिक सकता है। स्वयं को जो पसंद है वह महत्वपूर्ण है ही, परंतु जो दुनिया को भी पसंद आए ऐसा कार्य करने वाला व्यक्ति ही सफल होता है, ऐसा बताते हुए उन्होंने क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का उदाहरण दिया। साथ ही विद्यार्थियों को अपने माता-पिता के प्रति सदैव कृतज्ञ रहने का संस्कारपूर्ण संदेश भी दिया।
दूसरे मार्गदर्शक एवं पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विशेषज्ञ डॉ. नितीन विघ्ने ने बदलते समय की शैक्षणिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दुनिया किस दिशा में जा रही है, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि हमारी रुचि और ज्ञान किस क्षेत्र में है, इस पर विद्यार्थियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए। बी.ए. एवं बी.कॉम जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रम धीरे-धीरे अप्रासंगिक होते जा रहे हैं और विद्यार्थियों को उपलब्ध लगभग 5500 से अधिक करियर विकल्पों का गहन अध्ययन करना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी में एक अलग प्रतिभा होती है, उसे पहचानकर सही दिशा में प्रयास करने से भविष्य उज्ज्वल बन सकता है।
डिजिटल प्रणाली के अतिरेक से बचते हुए स्व-अध्ययन पर अधिक ध्यान देना चाहिए तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए नई तकनीकों को अपनाना आवश्यक है, ऐसा उन्होंने कहा। कार्यक्रम का प्रास्ताविक शशिकांत मोहिते ने किया, संचालन आनंदकुमार महाले ने किया तथा आभार नितीन तुपेकर ने व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न करने हेतु संस्था के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों ने परिश्रम किए।
