पर्यटन के संभावनाओं की तलाश करेगी नागपुर का विकास
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नागपुर। नागपुर वैचारिक मंच नागपुर शहर विषय पर हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभा कक्ष में चिंतन मंथन करते हुए संपादक पत्रकार एस एन विनोद ने नागपुर शहर को अविभाजित भारत का हृदय स्थल निरूपित कर, सक्षम अधिकारी चंद्रशेखर के स्वच्छता और नगर विकास अभियान का कौतुक किया तथा जीरो माइल के साथ अन्य स्थलों को चिन्हित कर पर्यटन की संभावनाएं तलाश करने पर बल दिया। जिसे उन्होंने विकास की धुरी माना। वरिष्ठ चिकित्सक व साहित्य ऋषि डॉ. लोकेंद्र सिंह ने काव्यमय प्रस्तुति के साथ नागपुर शहर को नगर रहवासी बड़ा गांव मानते हैं। जहां जलजले, दंगे, बाढ़ आदि नहीं के बराबर हैं, और हम आपसी समन्वय से विकास की धारा में परिवर्तन तो निश्चित ला सकते हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार धृति बेडेकर ने नागपुर भूमि की विज्ञान, साहित्यिक,सांस्कृतिक, कला साहित्य के साथ खनिज बाहुल्य क्षेत्र उद्धृत कर प्रश्न किया, अन्य नगर कैसे विकास की धारा में हमारे शहर से आगे निकल गए, सोचना होगा। उन्होंने प्रसिद्ध अर्थविद खांदेवाले के साथ नोबेल पुरस्कार से सम्मानित सी वी रमन की कर्म भूमि उल्लेखित कर कहा, जोर- जोर शोर से शुरू होता है, वह जल्दी ही ठंडा भी हो जाता है। शायद नगर योग्य प्रतिनिधि का इंतजार कर रहा है। सुप्रसिद्ध समीक्षक कथाकार इंदिरा किसलय ने नागपुर शहर के इतिहास का जिक्र कर जीरो माइल, दीक्षाभूमि, ड्रैगन पैलेस, बर्डी किला आदि के साथ आस्था से जुड़े हुए पुरातत्व स्थलों का वर्णन कर ,जर्जर होती इतिहास वर्णित हस्तियों की समाधियों के पुनरुद्धार पर बल देकर कला शैली और शिल्प को संजोने का प्रयास होना चाहिए।
मराठी, हिंदी, अंग्रेजी की वरिष्ठ अनुवादक नेहा भंडारकर ने नागपुर शहर के पुरातन मंदिरों के साथ बदलते नागपुर के मेट्रो, फ्लायओवर, मिहान के साथ संघर्षरत और बदलती परंपराओं में हो रहे विकास पर समाधान व्यक्त किया। ब्रह्मांडलिय गुरुत्वाकर्षण संशोधन उपक्रम के साथ नागपुर में नए आयाम का स्वागत किया, साथ ही नागपुर की विरासत से चली आ रही पुरातन संस्कृति को एकमेव अनोखी धरोहर व्यक्त किया। वरिष्ठ लघु कथाकार उषा अग्रवाल ने नागपुर को संतरा शहर की उपमा के साथ कपास उद्योग पर विकास के लिए किए गए कार्यों की कमी को अवनति का कारण माना।
संपादक साहित्यकार कृष्ण नागपाल ने शहर को हिंदी साहित्य में अग्रसर बता राजनीतिक हस्तक्षेप से पनपते भ्रष्टाचार को विकास में अवरोध माना। प्रख्यात वकील और मंच कवि ओ डी जैन ने नगर निर्माण में 1965 में समाविष्ट 31 गांव के साथ 1951 के मेडिकल कॉलेज से शुरू होते हुए चिकित्सालय के साथ आधुनिक विकास के साथ मॉडल मिल, एमप्रेस मिल और बुनकर समाज के साथ हुए अन्याय, अभाव व हानि जो हुई उसका जिक्र कर आज आम आदमी पर कर व्यवस्था के संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया। नागपुर के सहकार ऋषिबाबू टक्कामोरे जी की नीति और सहयोग पर कार्य करने के महत्व को समझाया।
मूर्तिकार गुरु कौशल ने नागपुर के खानपान और निर्यात से प्रसिद्ध हुई नागपुरी सोनपापड़ी और तरी पोहा का जिक्र किया। प्रसिद्ध चिंतक अनिल त्रिपाठी ने बदलते सीमेंट कंक्रीट के जंगल के साथ बदले रेलवे स्थानक और विकास के नाम पर आए हुए मेट्रो और बस स्थानक आदि की आपसी कनेक्टिविटी पर विचार करने पर जोर दिया। व्यवसायिक और संपादक दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने नागपुर के इतिहास के 324 साल को बताते हुए अंग्रेजों द्वारा योजनाओं और विकास की गति को इतिहास के परिपेक्ष में प्रस्तुत कर राजनीतिक दबाव के साथ आर्थिक विकास प्रणाली कि प्रशंसा की। विदर्भ को भारतीय ऐतिहासिक धरोहर बता उन्होंने महाभारत काल से जोड़ा।
संयोजक व्यंग्य कवि राजेंद्र पटोरिया ने कृष्णानंद सोक्ता, मुक्ति बोध, सुरेश भट्ट के साथ शहर के क्रमिक विकास और इतिहास को प्रस्तुत किया। संपादक व कथाकार नरेंद्र परिहार ने विकास के कार्यक्रमों में विभागों के आपसी ताल मेल की, योजना बनाते समय अभाव पर चिंता व्यक्त कर, नागपुर के प्रसिद्ध व्याघ्र प्रोजेक्ट व जनमानस के सामूहिक आर्थिक विकास पर बल दिया। कवित्री माधुरी राउलकर ने नागपुर शहर के अपने मंच को यूं प्रस्तुत किया - जीने को तो है काबिल इस शहर में, मगर जीना है मुश्किल इस नगर में। क्या कमी हो सकती है इस शहर में, जब वैचारिक मंच की महफिल है इस नगर में- विषय की प्रस्तावना और आभार संयोजक राजेंद्र पटोरिया और 19 अप्रैल 2026 का विषय सांप्रदायिक सौहाद्र सूचित कर सदस्यों को उपस्थित होने का आग्रह सह संयोजक नरेंद्र परिहार ने किया।
