पशु, पक्षी, पेड़, पौधों से हमारा जीवन चक्र जुड़ा है : संजय सायरे
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उभरते सितारे मे 'पशु पक्षी और जीवन'
नागपुर। हमारी इस सुंदर पृथ्वी में जलचर, थलचर और नभचर रूपी जीवों के साथ एक गहरा संबंध है। इस पृथ्वी में पशु, पक्षी, पेड़- पौधों को भी जीने का हक है। इनके साथ हमारा एक जीवन चक्र जुड़ा है। पशु हमारे खेत में, खलिहान में काम आते हैं। वैसे ही, पक्षी भी हमारे लिए एक महत्वपूर्ण घटक है। आज इस युग में हर तरफ विकास की दौड़ में पेड़ पौधों को बहुत नुकसान हो रहा है। तालाब घटते जा रहे हैं, जिससे पशुओं और पक्षियों को पीने के लिए पानी मुश्किल से उपलब्ध होता है। सभी ने पक्षियों के लिए पानी जरूर रखना चाहिए। जियो और जीने दो, इसका सभी ने ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यह हमारे जीवन का महत्वपूर्ण अंग है। यह विचार संजय सायरे ने बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच रखें।
विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन का नवोदित प्रतिभाओं को समर्पित उपक्रम 'उभरते सितारे' का आयोजन हिंदी मोर भवन के उत्कर्ष हॉल में किया गया। कार्यक्रम का विषय 'पशु पक्षी और जीवन' पर आधारित शिक्षाप्रद, ज्ञानवर्धक और संगीतमय प्रस्तुतियों से भरा रहा। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप मे नाट्य दिग्दर्शन एवं प्रबुद्ध विद्यालय के मुख्याध्यापक संजय शिवाजी सायरे जी उपस्थित थे। इनका सम्मान प्रशांत शंभरकर और संयोजक युवराज चौधरी ने स्वागत वस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर किया।
तत्पश्चात, सभी बच्चों ने भी पशु पक्षी और जीवन विषय पर सुंदर विचार रखते हुए शानदार नृत्य और गीतों की प्रस्तुति दी। जिसमें, भव्या अरोरा ने शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। सुतीक्ष सूरज रामटेके, अवनी मेश्राम, सानवी मेश्राम, भव्या अरोरा, आस्था गुजर, आदित मिंज और अर्चिता लखोटे ने शानदार गीतों की प्रस्तुति दी।
बच्चों की प्रस्तुतियों को उनके अभिभावकों के साथ- साथ गीता सुरेश मिंज, संगीता जवाहर तरार, स्वाति गुजर, वेदप्रकाश अरोरा, मीनाक्षी केसरवानी, वैशाली मदारे, स्नेहा रामटेके, निकिता बागड़े, देवकाबाई सायरे, पम्मी सायरे, सुषमा मेश्राम, संजय गोडघाटे, अश्विनी अजय लखोटे आदि ने बहुत सराहा। कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रशांत शंभरकर ने किया। तथा, उपस्थित सभी दर्शकों, कलाकारों और बच्चों का आभार संयोजक युवराज चौधरी ने व्यक्त किया।


