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विश्व रक्तदाता दिवस पर थैलेसीमिया सोसायटी ने शुरू किया ‘रक्तमित्र अभियान’


नागपुर। विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर रविवार को थैलेसीमिया एंड सिकल सेल सोसायटी ऑफ इंडिया (TSCSI) के अध्यक्ष एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विंकी रुघवानी ने अपने थैलेसीमिया एवं सिकल सेल रोग डे-केयर सेंटर में पंजीकृत मरीजों के लिए 'रक्तमित्र अभियान' की शुरुआत की। उन्होंने स्वैच्छिक रक्तदान को सुरक्षित और पर्याप्त रक्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी और टिकाऊ माध्यम बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से नियमित रक्तदान करने की अपील की। इसी उद्देश्य से TSCSI ने 'रक्तमित्र अभियान' नामक फिक्स्ड ब्लड डोनर पूल कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। 

इस पहल के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. रुघवानी ने बताया कि अभियान के तहत कम से कम एक हजार रक्तदाताओं का समूह तैयार किया जाएगा। इन रक्तदाताओं के रक्त समूह का मिलान डे-केयर सेंटर में पंजीकृत बच्चों से किया जाएगा तथा प्रत्येक बच्चे के लिए 10 से 15 नियमित रक्तदाताओं को जोड़ा जाएगा। इन बच्चों को जीवनभर हर दो से तीन सप्ताह में रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मौजूदा रक्तदान व्यवस्था को और मजबूत बनाना तथा नियमित रक्ताधान पर निर्भर मरीजों के लिए रक्त की अधिक विश्वसनीय और सुनिश्चित उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

डॉ. रुघवानी ने कहा कि रक्त संग्रह के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद भारत में समय- समय पर रक्त की कमी की स्थिति उत्पन्न होती रहती है। उन्होंने कहा- हाल के भीषण गर्मी के महीनों में रक्तदान के लिए आगे आने वाले लोगों की संख्या में कमी आई। इसके कारण रक्त बैंकों में उपलब्ध रक्त की मात्रा प्रभावित हुई। ऐसी परिस्थितियां थैलेसीमिया मरीजों और उनके परिवारों के लिए बेहद कठिन होती हैं। 

उन्होंने बताया कि सोसायटी के थैलेसीमिया एवं सिकल सेल डे-केयर सेंटर के माध्यम से 500 से अधिक बच्चों को सेवाएं प्रदान की जा रही हैं, जिनका जीवन नियमित रक्ताधान पर निर्भर है। यद्यपि संस्था सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न रक्त बैंकों के साथ समन्वय स्थापित करती है, फिर भी मौसमी कमी और रक्तदाताओं की संख्या में उतार-चढ़ाव व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।

डॉ. रुघवानी ने कहा कि बार-बार अलग-अलग रक्तदाताओं से रक्त प्राप्त करने के कारण मरीजों की प्रतिरक्षा प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिसे फिक्स्ड डोनर पूल के माध्यम से काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा- जो लोग इस अभियान से जुड़ना चाहते हैं, वे जरीपटका स्थित हमारे अस्पताल TSCSI से संपर्क कर सकते हैं। यह एक ऐसा मॉडल है जिसे इस क्षेत्र में कार्यरत अन्य संस्थाएं भी  आसानी से अपना सकती हैं।

डॉ. रुघवानी ने बताया कि देश में प्रतिवर्ष लगभग 1.5 करोड़ यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है, जिसका उपयोग शल्य चिकित्सा, दुर्घटना उपचार, कैंसर उपचार, प्रसूति संबंधी आपात स्थितियों तथा विभिन्न दीर्घकालिक रक्त विकारों के उपचार में किया जाता है। उन्होंने कहा- रक्त किसी प्रयोगशाला में निर्मित नहीं किया जा सकता। रक्त बैंक में उपलब्ध प्रत्येक यूनिट किसी न किसी स्वैच्छिक रक्तदाता द्वारा ही दान की गई होती है। हमारी पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था नियमित रूप से रक्तदान करने वाले सामान्य नागरिकों की भागीदारी पर निर्भर करती है।

डॉ. रुघवानी ने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे केवल आपातकालीन परिस्थितियों में ही नहीं, बल्कि नियमित रूप से रक्तदान करें। उन्होंने कहा- नियमित स्वैच्छिक रक्तदाता हमारी रक्ताधान सेवाओं की वास्तविक रीढ़ हैं।  उन्होंने नागरिकों से रक्तदान को कभी-कभार किए जाने वाले दान कार्य के बजाय सामाजिक  उत्तरदायित्व के रूप में देखने का आग्रह किया।

डॉ. रुघवानी ने कहा- विश्व रक्तदाता दिवस पर हमें अपने स्वैच्छिक रक्तदाताओं का आभार व्यक्त करना चाहिए और अधिक से अधिक लोगों को इस जीवनरक्षक अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। हमारे डे-केयर सेंटर में पंजीकृत बच्चों और रक्ताधान पर निर्भर हजारों अन्य मरीजों के लिए नियमित रक्तदाता वास्तव में जीवनदाता हैं।
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