योग
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जिससे मिटता तन-मन का त्रास।
स्वस्थ शरीर, निर्मल विचार,
योग है जीवन का सच्चा आधार।
जब आसनों की धारा बहती,
शक्ति नई हर अंग में रहती।
प्राणायाम की गहरी साँसें,
भर देती हैं आशा की किरणें।
चंचल मन को शांति मिलती,
अंतर की हर गाँठ खुलती।
ध्यान की निर्मल, शांत डगर,
ले जाती है आत्मा के घर।
योग सिखाता संतुलन प्यारा,
सुख-दुख में रहना न्यारा।
संयम, साहस, प्रेम का धन,
करता है उज्ज्वल हर जीवन।
आओ योग को मित्र बनाएँ,
स्वास्थ्य का अमृत घर ले आएँ।
तन हो स्वस्थ, मन हो महान,
यही योग का दिव्य वरदान।
स्वस्थ तन, शांत मन का मान,
योग है सशक्त जीवन की पहचान।
- डॉ. अपराजिता शर्मा
रायपुर, छत्तीसगढ़
