साहित्यिकी में ‘किताबें बोलती है’ का सफल आयोजन
https://www.zeromilepress.com/2026/06/blog-post_22.html
नागपुर। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के साहित्यिकी में ‘किताबें बोलती हैं’ का अत्यंत सफल आयोजन संपन्न हुआ। आयोजन का आरंभ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। संयोजक द्वय हेमलता मिश्र मानवी एवं शादाब अंजुम ने महनीय अतिथि अध्यक्ष श्रीमती संतोष बुद्धिराजा का उत्तरीय से स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीपक गुप्ता ने सुभद्राकुमारी चौहान की रचना खूब लडी़ मर्दानी वह तो झाँसीवाली रानी थी से किया। माधुरी मिश्रा मधु ने ओजपूर्ण वाणी मे रामधारी सिंह दिनकर की रश्मिरथी से सूर्यपुत्र कर्ण को मानो गौरवपूर्ण अर्ध्य दिया।
सुषमा शर्मा ने साहित्यकार आनंद राज आनंद की पुस्तक मंमर सुहाना लगता है से भावपूर्ण रचना सुनाई। पूनम मिश्रा ने वरिष्ठतम साहित्यकार स्वर्गीय श्री हरभजनसिंह हंसपाल की पुस्तक कलम की धार से कवि हदय के चीत्कार दिखाकर सम्मेलन मे उपस्थित कवि हदयों की संवेदनाओं को झकझोर दिया।रविकुमार ने दिव्य प्रकाश दुबे की यार पापा से स्माईलिंग अंकल की कथा से माहौल को हल्का फुल्का कर दिया। विवेक ठोंबरे ने विनोद कुमार शुक्ल की पुस्तक दीवार में एक खिडकी रहती थी से सुंदर संचेतक अंश दिये।
माधुरी राऊलकर ने कुँवर बेचैन की चर्चित गजलों से आँधियाँ धीरे चलो सुना कर पटल को खुशनुमा एहसासों से भर दिया। अमिता शाह ने कमलकिशोर की मै याद आऊंगा से कविता मेरी मैयत में भी आना सुनाकर कक्ष को रोमाचित कर दिया। मेघा अग्रवाल ने जोशपूर्ण लहजे में बालिकाओं की मनभावन कहानियाँ से कटु सच्चाईयों से अवगत कराया। डाॅ विनोद भोयर ने नामवरसिंह की नागार्जुन के संदर्भ में कावय रचना सुना कर कक्ष को जोश से परिपूरित कर दिया। शादाब अंजुम ने पटल पर अपने सारगर्भित वक्तव्य से अनेक सूचनाएं दीं।
हेमलता मानवी ने संचालन के दौरान अनेक साहित्यकारों की रचनाओं पर बात की और डाॅ श्रीकान्त चोरघडें की किताब हम होंगे कामयाब से उत्तम अंश दिये। अतिथि अध्यक्ष संतोष बुद्धिराजा ने अपने उद्बोधन में सभी की प्रस्तुतियों की उत्कृष्ट समालोचना की। 25 पुस्तकों के रचयिता मिसाइल मैन डाॅ एपी जे अब्दुल कलाम की चुनौतियों से भरा सफर से उत्साहवर्धक अंश सुनाकर संपूर्ण कक्ष को अभिभूत कर दिया। अंत में कार्यक्रम हेमलता मिश्र मानवी ने अतिथि सहित सभी उपस्थितों का आभार व्यक्त करते हुये आयोजन के समापन की घोषणा की।
