सतर्क नागरिक पुलिस की सहायता से अपराधों पर अंकुश लगा सकते हैं : डॉ. एड. मृणाल भोंगाड़े
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नागपुर। विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन हिंदी मोर भवन, में संयोजक विजय तिवारी, सहसंयोजक हेमंत कुमार पांडे के मार्गदर्शन में उपक्रम चौपाल के अंतर्गत 'बढ़ती गुनहगारी में पुलिस का कर्तव्य और नागरिकों का सहयोग' इस विषय पर परिचय का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में डॉ. एड. मृणाल (घटे) भोंगाड़े मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम का प्रारंभ में माता सरस्वती की वंदना के साथ की गई। श्रीमती तिलोत्तमा त्रिवेदी व श्रीमती सुजाता सान्याल ने शाल व सम्मान चिन्ह देकर मुख्य अतिथि डॉ. एड. श्रीमती मृणाल (घटे) भोंगाड़े का स्वागत किया।
मदन गोपाल बाजपाई अपने जीवन में, सेवा काल में व अन्य प्रसंग में पुलिस के साथ व्यवहारिक अनुभव साझा किया। धीरज दुबे ने अपने संक्षिप्त विवरण में बढ़ते गुनाहों की संख्या में टीवी, मोबाइल, क्षमता से अधिक उच्च आकांक्षा व अल्प समय में ज्यादा प्राप्त करने की युवाओं की तीव्र इच्छा को कारण बताया। श्रीमती सुजाता सान्याल ने कस्टम विभाग के कर्मचारियों अधिकारियों द्वारा किए गए व्यवहार के अनुभव अपने व्यक्तय में प्रस्तुत किया। श्रीमती माधुरी राऊलकर ने एक बहुत ही सुंदर ढंग से बढ़ते गुनहगारी व इसके कारण पर बहुत ही अच्छी स्व लिखित कविता प्रस्तुत की।
डॉ. बच्चू पांडे ने उनके जीवन में पुलिस के द्वारा व्यवहार में व सामाजिक जीवन में आए अनुभव के प्रसंग प्रस्तुत किया। इसी प्रकार उन्होंने बढ़ाती गुनाहो के कारणव उनके निवारण पर चर्चा की। एड. जगत बाजपेई ने अपने देश में बढ़ते गुनहगारी के अनेक कारण बताते हुए व उसके निवारण के लिए किए जाने वाले प्रयासों के बारे में विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल के उदाहरण पेश किये। इसी प्रकार उन्होंने विश्व के ऐसे अनेक देश बताए जहां पर जनसंख्या कम होने की वजह से गुनाह शून्य है।
मुख्य अतिथि डॉ. एड. श्रीमती मृणाल (घटे) भोंगाड़े पुलिस प्रशासन नागरिक व न्यायालयीन प्रक्रिया में होने वाली छोटी- मोटी भूल, लापरवाही को अपनी कमजोरी बताई और उन्होंने नागरिकों से अपने अधिकार का ज्ञान होने व कर्तव्य करने की इच्छा होने पर जोर दिया। उन्होंने हर प्रकार के दस्तावेजों को बारीकी से अध्ययन कर उसे समझ कर अपने अधिकारों का प्रयोग करने की सलाह दी व आवश्यकता पड़ने पर शासन, प्रशासन, पुलिस व न्यायप्रणाली को सहयोग करने की सलाह दी।
कार्यक्रम का सफल संचालन सह संयोजक हेमंत कुमार पांडे ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सर्व श्रीमती तिलोत्तमा त्रिवेदी, रानी त्रिवेदी, शीतल शेडें सर्वश्री आनंद मुले, शत्रुघ्न तिवारी, अमरीश दुबे, ओमप्रकाश कहाटे, जयशंकर तिवारी, अपना अमूल्य सहयोग दिया।
