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भारतीय शिक्षा दिवस का आयोजन


नागपुर। शिक्षा और संस्कृति का भारतीय दृष्टि से उन्नयन समय की आवश्यकता है। विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए शिक्षा की भारतीय पद्धति पर चिंतन अपेक्षित है। जब तक भारतीय शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्र की अपेक्षा के अनुरूप नहीं अपनाया जाएगा तब तक विकास की संकल्पना अधूरी है। यह बात शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के स्थापना दिवस कार्यक्रम में प्रज्ञा प्रवाह के महाराष्ट्र क्षेत्र संयोजक सुनील किटक रू ने कही। उन्होंने न्यास के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिवस वास्तव में भारतीय शिक्षा दिवस है। इस दिन भारतीय शिक्षा को एक नई दिशा मिली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में न्यास के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने बताया कि विकसित भारत का सपना पूरा करने में यह अनुकरणीय पहल है।

क्षमा शंकर तिवारी ने इसे राष्ट्रीय दायित्व मानते हुए कहा कि यह दिवस हमें प्रेरित करता है। भारतीय शिक्षा दिवस भारतीय मूल्य चेतना का दिवस है । न्यास के विदर्भ प्रांत संयोजक डॉ.मनोज पांडे ने बताया कि न्यास के स्थापना दिवस को  भारतीय भाषा दिवस के रूप में मनाने का संकल्प लिया गया है। यह दिन भारतीय शिक्षा के इतिहास में परिवर्तनकारी दिवस के रूप में देखा जाता है। कार्यक्रम का आयोजन विदर्भ प्रांत के तत्वावधान में सिंधी हिंदी पाठशाला गांधीबाग में किया गया. प्रस्तावना डॉ. एकादशी जैतवार ने रखी। सूत्र संचालन साक्षी लालवानी ने तथा आभार प्रदर्शन अनुश्री सिन्हा ने किया।
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