अंतरंग महिला चेतना मंच ने उत्साहपूर्वक मनाया दशहरा, शरद पूर्णिमा एवं करवाचौथ का उत्सव



पारंपरिक वेशभूषा, गीत-संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों ने बांधा समां; सखियों ने साझा किए त्योहारों के सांस्कृतिक एवं पारिवारिक महत्व


नागपुर। भारतीय संस्कृति और त्योहारों की परंपराओं को समर्पित विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के उपक्रम अंतरंग महिला चेतना मंच का मासिक आयोजन हर्षोल्लास एवं आत्मीय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर दशहरा, शरद पूर्णिमा एवं करवाचौथ का उत्सव पारंपरिक रीति-रिवाजों, गीत-संगीत, नृत्य और परिचर्चा के साथ मनाया गया।



कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं मुख्य अतिथि प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलम पुन्यानी द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। उनका स्वागत अंगवस्त्र एवं स्मृतिचिह्न भेंट कर किया गया। विशिष्ट अतिथि स्मिता देशमुख ने सरस्वती वंदना तथा शरद पूर्णिमा पर आधारित सुमधुर गीतों की प्रस्तुति देकर वातावरण को संगीतमय बना दिया।



कार्यक्रम की प्रस्तावना, संचालन एवं आभार प्रदर्शन संयोजिका शगुफ्ता यास्मीन ने किया। अपने उद्बोधन में डॉ. नीलम पुन्यानी ने कहा कि भारतीय त्योहार हमें संयम, कृतज्ञता, पारिवारिक समर्पण, प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं। उन्होंने इस सुंदर आयोजन के लिए मंच की सभी सखियों को बधाई दी।


दशहरा, शरद पूर्णिमा एवं करवाचौथ के सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर आयोजित परिचर्चा में अलका देशपांडे, शशि अभिचंदानी, सुषमा भांगे, शिवानी सिंह, मेघा अग्रवाल, सारिका विजयवर्गीय, चंदा कुलसांगे एवं सुमन मेश्राम ने अपने विचार व्यक्त किए। नंदिनी सुदामल्ला एवं आरती पाटिल ने चांद पर आधारित गीत प्रस्तुत किए। वहीं छवि चक्रवर्ती, लक्ष्मी वर्मा एवं सरिता लाकुड़कर ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया।


करवाचौथ उत्सव के अंतर्गत सखियां पारंपरिक वेशभूषा एवं सोलह श्रृंगार में सजकर पहुंचीं। संगीतमय वातावरण में पूजा की थालियों का आदान-प्रदान किया गया तथा करवाचौथ की कथा और गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से इस पर्व की परंपराओं को सजीव किया गया। इस अवसर पर संतोष बुद्धराजा, अनिता गायकवाड, अर्चना चौरसिया, कोमल शर्मा, ममता सिंह परिहार, विधि ग्वालानी, प्रतिभा भोले, किरण हटवार एवं रश्मि मिश्रा ने मंच पर करवाचौथ की परंपराओं का सुंदर प्रदर्शन किया।


आयोजन में डॉ. शीला भार्गव, माया शर्मा, रूबी दास, सुषमा शर्मा, अनीता गुप्ता, नंदा वजीर, संध्या लाकुड़कर, रंजना देशमुख, ज्योति राठी, सुजाता दुबे एवं संध्या नंदपुरकर सहित अनेक सखियों की सक्रिय सहभागिता रही। रेशम मदान एवं जिगिशा शाह ने विशेष सहयोग प्रदान किया।


कार्यक्रम के अंत में मंच की निरंतर चलने वाली साहित्यिक श्रृंखला ‘चलती-फिरती लाइब्रेरी’ के अंतर्गत सखियों ने पुस्तकों का आदान-प्रदान किया। इस पहल के माध्यम से पठन-पाठन एवं साहित्य के प्रति रुचि को प्रोत्साहित किया गया।


सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, पारंपरिक उत्सव, विचारों के आदान-प्रदान और साहित्यिक गतिविधियों से सजा यह आयोजन आनंद, आत्मीयता एवं महिला सहभागिता का सुंदर उदाहरण बना।


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