गीता जयंती एवम तुलसी पूजन दिवस का हुआ विशाल आयोजन
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भारतीय संस्कृति को अपनाने पर दिया बल
कवि कृष्ण कुमार सैनी
दौसा। देवनगरी दौसा में श्री योग वेदांत सेवा समिति के तत्वावधान में भारतीय संस्कृति के निमित्त श्रीमद्भागवत गीता जी जयंती व तुलसी पूजन दिवस का विशाल आयोजन किया। वक्ता प्रेम चतुर्वेदी ने बताया कि प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस मनाया जाता है।
तुलसी पूजन दिवस भारतीय संस्कृति का एक पवित्र दिवस है। तुलसी केवल एक पौधा ही नहीं बल्कि धरा के लिए वरदान है और इसी वजह से भारतीय संस्कृति में इसे पूज्यनीय माना गया है। वर्तमान में चल रही कोरोना महामारी में भी चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों ने हैं तुलसी माता की उपयोगिता को बताया है तथा तुलसी का सेवन कोरोना में कारगर साबित हुआ है।
तुलसी माता में अनेक गुण विद्यमान है और इसके जरिए अनेक रोगों जैसे बीपी, सुगर, तनाव, अपच, जुकाम, खाँसी आदि का इलाज भी संभव है। भारतीय संस्कृति में तुलसी को माता के समान पूजा जाता है। तुलसी का पौधा अत्यधिक शुभ माना जाता है। भारतीय संस्कृति औषधीय मूल्य भी हैं। इसे अच्छे स्वास्थ्य के लिए वरदान माना जाता है और इसे ‘जड़ी-बूटियों की रानी’ कहा जाता है।
आम सर्दी और फ्लू के इलाज के लिए तुलसी की चाय का सेवन किया जाता है। तुलसी के पत्तों के नियमित सेवन से खांसी आदि को रोकने में भी मदद मिलती है। 25 दिसम्बर से 1 जनवरी के दौरान शराब आदि नशीले पदार्थों का सेवन, आत्महत्या जैसी घटनाएँ, युवाधन की तबाही एवं अवांछनीय कृत्य खूब होते हैं।
इसलिए प्राणिमात्र का मंगल एवं भला चाहने और करने वाले पूज्य आशाराम बापूजी ने वर्ष 2014 में आह्वान किया था कि 25 दिसंबर से एक जनवरी तक तुलसी - पूजन, जप - माला पूजन, गौ - पूजन, हवन, गौ - गीता-गंगा जागृति यात्रा, सत्संग आदि कार्यक्रम आयोजित हों। उसी के चलते आज तुलसी पूजन दिवस पर बापूजी के अनुयायियों द्वारा तुलसी माताजी की एवं श्रीमद् भागवत गीताजी की आरती एवं पूजन किया।
हमें हमारी भारतीय संस्कृति के संरक्षण हेतु सदैव तत्पर रहना चाहिए। हमें हमारी भारतीय संस्कृति की परंपरा को जीवित रखना है और साधु संतों द्वारा बताए गए मार्गो पर चलना है। तुलसी पूजन में अनेक महिलाओं, पुरुषों सहित बच्चें भी मौजूद रहे।



