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व्यक्तित्व विकास के लिए उपक्रमों में रहे व्यस्त : कु. जिया खान


नागपुर/पुणे। कोरोना काल कब तक रहेगा इसकी कोई गारंटी नहीं। परंतु हमें अपने व्यक्तित्व विकास के लिए निरंतर शैक्षिक तथा सांस्कृतिक उपक्रमों में व्यस्त रहना होगा। ये बात पुणे स्थित मनसुखभाई कोठारी नेशनल स्कूल की आठवीं 'ए' कक्षा की छात्रा  कु. जिया रियाज खान ने कही। 

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में आयोजित आभासी बाल संसद में मुख्य अतिथि के रूप में वह अपना मंतव्य दे रही थी। बाल संसद की अध्यक्षता कु. समृद्धि तिवारी, प्रयागराज ने की। कु. जिया खान ने आगे कहा कि पिछले लगभग चौदह-पन्द्रह  महीनों से पूरा विश्व कोरोना महामारी की चपेट में है। हम भी कोरोना से जूझ रहे हैं। 

मार्च 2020 के अंतिम सप्ताह में जब पूर्ण तालाबंदी की घोषणा हुई तब से हमने सरकार के सभी नियमों का पालन करते हुए अपनी शैक्षिक गतिविधियों को जारी रखा हैं। आनलाइन कक्षाओं से कुछ राहत मिलकर विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज की विभिन्न प्रतियोगिताएं हमारे लिये वरदान सिद्ध हुई।
      

बाल संसद में सम्मिलित बालकों को बताया गया था वे कोरोना काल के अनुभवों को निसंकोच रूप से व्यक्त करें। लगभग पन्द्रह बालकों ने इस बाल संसद में सक्रिय हिस्सा लिया।
        

कु. अवनी तिवारी, इंदौर ने कहा कि कोरोना काल में हमें नई नई बातें सीखनीं मिली है। एक साथ रहकर संघर्ष करने की हिम्मत आयी। कु. अन्वी जायसवाल, दुर्ग , छत्तीसगढ़ ने कहा कि घर में बंद होने से शुरु में अच्छा नहीं लगा। लेकिन बाद में चित्रकारी, कविता,गीत गाने जैसे छंदो में अपने आपको व्यस्त रखा। विशेष बात तो यह है कि हम स्कूल नहीं जा सकते थे  बल्कि स्कूल हमारे घर आये । शुभ द्विवेदी, प्रयागराज ने कहा कि ऑनलाइन कक्षाएं और ऑनलाइन परीक्षाएं हमारे लिए चुनौती थीं, परंतु हमने परिस्थिति से समायोजन करके सफलता पायी। धैर्य दीक्षित, गुड़गांव, हरियाणा ने कहा कि परिवार के साथ समय व्यतीत करते हुए हमने मस्ती करना भी सीखा। कु. ऋषिता कुंभज, शिलांग, मेघालय ने कहा कि कोरोना के डर से हम अपने गांव चले गए। लेकिन वहाँ भी नेटवर्क की समस्या का सामना करना पड़ा।

बाल संसद मे कु. अन्नपूर्णा, प्रयागराज; श्री शौर्य दीक्षित, गुड़गांव, हरियाणा; कु. मानसी शर्मा, भोपाल तथा श्री मोक्ष कुंभज, शिलांग ने भी अपने अनुभवों को मुक्त रुप से साझा किया। बाल सभा की अध्यक्षता का समापन करते हुए कु. समृद्धि तिवारी, प्रयागराज ने कहा कि प्रारंभ मे कोरोना में परेशानी हुई परंतु बाद में हम अपनी रुचि के कार्यो में व्यस्त रहे। अत: हमें नयी नयी परियोजनाओं के साथ व्यस्त रहना होगा। बाल संसद का शुभारंभ कु. मानसी शर्मा, भोपाल की सरस्वती वंदना प्रस्तुति से हुआ। 

तत्पश्चात विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज के सचिव डॉ. गोकुलेश्वर कुमार द्धिवेदी ने अतिथि स्वागत मे संस्थान के उद्देश्यों व कार्यो पर प्रकाश डाला। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज की छत्तीसगढ़ इकाई की सांसद डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक, रायपुर, छत्तीसगढ़ ने कहा कि बाल संसद मे कोरोना काल मे इस तरह का कार्यक्रम सराहनीय है। इससे छोटे बच्चों में आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, सजृनात्मक कार्य करने की प्रेरणा मिलती हैं। डॉ. रश्मि चौबे, गाजियाबाद, उ. प्र. ने भी अपने विचार रखे। 

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज के अध्यक्ष प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन नियाज़ मुहम्मद शेख, पुणे ने कहा कि बालकों को अभिव्यक्ति की क्षमता छात्रावस्था से प्राप्त करनी चाहिए। विचारों की क्रमबद्धता के लिए विदयार्थी को श्रवण, लेखन, मनन, चिंतन व भाषण कला पर बल देना चाहिए। बाल संसद का संचालन कु. दीपाली कौशिक, रायपुर ने किया तथा श्रीमती पूर्णिमा कौशिक, रायपुर ने सभी के आभार व्यक्त किये।

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