रीता मंडल को मिला नेशनल यूथ आइकन अवार्ड
शिक्षा एवं समाज सेवा में कार्य करते हुए कायम की मिसाल
नागपुर/रायपुर। वर्तमान में जब पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है तो समाज में कुछ ऐसे लोग भी है जिन्होंने अपने जज्बे और जुनून के बल पर समाज में बेहतर कार्य करते हुए समाज को एक नई दिशा देने का काम किया है। युथ फ़ॉर यूनीवर्सल एंड वोलिएंट्री एक्शन द्वारा ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें नेशनल यूथ आइकन अवार्ड 2021 दिया गया है।
छत्तीसगढ़ से इस अवार्ड के लिए रीता मंडल का चयन हुआ है। नेशनल यूथ आइकन अवार्ड 2021 समाज के उन युवाओं को समर्पित है जिन्होंने शिक्षा व समाज सेवा आदि क्षेत्रों में कार्य करते हुए एक नई मिसाल कायम की है।
पढ़ई तुहर द्वार कार्यक्रम शुरू हुआ तो समग्र शिक्षा विभाग रायपुर द्वारा प्रेषित समय सारणी के अनुसार कक्षा आठवीं गणित की निरंतर वेबेक्स ऐप के द्वारा बच्चो की जिला स्तरीय तथा राज्य स्तरीय कक्षाएं ले रही थी। इन्होंने cgschool.in में भी अपने कई विडियोज और कंटेंट अपलोड किए है। अपने जिले में लगभग 100 शिक्षकों को वेबेक्स ऐप तथा उसे cgschool.in में मर्ज करने की ट्रेनिंग भी दी हैं।
ब्लॉक लेवल पर प्रत्येक दिवस के ऑनलाइन क्लासेस की मॉनिटरिंग का कार्य भी इनके द्वारा किया जा रहा हैं, जिसे प्रतिदिन एकत्र कर डी ई ओ कार्यालय भेजा जाता है। इनके द्वारा एससीईआरटी में ऑनलाइन पाठ सामग्री निर्माण कार्य (जुगाड स्टूडियो) में वीडियो तथा ऑडियो भी गणित विषय (मिडिल स्तर) का बनाया गया है जो कि पीटीडी यूट्यूब चैनल पर डाला जा चुका है।
पढ़ई तुहर द्वार के अंतर्गत इनके द्वारा , अगस्त 2020 से ही रायपुर, छत्तीसगढ़ के अलग अलग स्थानों में, मोहल्ला क्लास लगाया जा रहा है। मोहल्ला क्लास रायपुर के कबीरनगर अटल आवास, वाल्मीकि नगर, तेलीबांधा, शांतिनगर तथा नूरानी चौक में संचालित है जिसमे शिक्षा सखियों द्वारा मदद ली जाती है।
समस्या यह थी कि एक ही स्थान पर सभी कक्षा के बच्चे एकत्रित होते। अलग अलग कक्षा के बच्चो को एक साथ पढ़ाना मुश्किल लग रहा था जिसके लिए इन्होंने नवाचार के रूप में प्रतिदिन, जो सभी कक्षा में लागू हो ऐसे संयुक्त टॉपिक्स चुनकर, जैसे आर्टिकल, गणितीय आकृतियां, व्याकरण, पहाड़े, गणितीय संक्रियाएं, दैनिक जीवन में विज्ञान की अवधारणाये आदि एवं उससे संबंधित एक्टिविटी के जरिए बच्चो को पढ़ाई से जोड़ने का प्रयास किया।
तब इन्होंने पाया कि एक्टिविटी में कुछ बनाने के लिए बच्चो के पास सामान्य चीजे भी उपलब्ध नहीं है, जैसे गोंद , कैंची, कलर्स, ड्राइंग शीट इत्यादि। तब इन्होने मन में निश्चय किया कि, कि क्यों ना इनके लिए सभी सामान खरीदकर इनके सामने रखा जाये , ताकि वे अपनी पसंद के रंग और सामान चुनकर एक्टिविटी करे। इन्होंने सामानों को खरीदा और एक पेटी में रखा और प्रतिदिन पेटी लाकर , इन बच्चो को अपनी पसंद के सामान चुनने कहती है और इस प्रकार बच्चो की मोहल्ला क्लास नए अंदाज़ में लेती है।
इससे बच्चो की अवधारणा एक्टिविटी के जरिए स्पष्ट भी होती है, सभी बच्चे क्लासरूम एक्टिविटी में भाग लेते है चाहे किसी भी कक्षा के हो तथा बच्चे कक्षा को रुचिकर भी महसूस करते है। इससे बच्चो की संख्या भी बढ़ी और धीरे धीरे बच्चे इन्हें प्यार से पेटी वाली दीदी बुलाने लगे।
