'शेष होते शब्द' काव्य संग्रह में जीवन के हर पहलू को मोतियों जैसा पिरोया गया है
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'शेष होते शब्द' काव्य संग्रह कवयित्री श्वेता दीप्ति की विविध मनोवृत्तियों के साथ मनोस्थितियों संघर्षों को उजागर करता है। समय, परिस्थिति, संघर्ष, आशा, निराशा जीवन के हर पहलू को अनुभव करता है यह संग्रह।
शब्द की शक्ति अप्रतिम है। शब्दों से मानव की मन स्थिति कागज पर उकेरी जा सकती है। यह कार्य इस संग्रह में हर तरह से पढ़ने को मिलती है। हृदय की शुन्यावस्था से लेकर जीवन के हर पहलू को मोतियों जैसे पिरोया गया है। शेष होते शब्द में सपनों को खोजता मन या बदलता मौसम, सुखी नदी या आकाश, और समय हर पहलू को मानो इस कदर पिरोया गया है कि आप चकित रह जाएंगे।
आर के पब्लिकेशन मुंबई भारत से नेपाल की डॉक्टर श्वेता दीप्ति की प्रकाशित काव्य संग्रह "शेष होते शब्द" पढ़कर आम जन भावना को आप महसूस करेंगे। 'शेष होते शब्द' हृदय को छू जाती है इस काव्य संग्रह की विशेषता यह है कि यह हमारे महसूस किए हर पहलू को हमारे सामने रखती है मानो हम सब इन पहलुओं से गुजर चुके हैं। महसूस कर चुके हैं। नेपाल में कार्यरत हिमालिनी मासिक हिंदी पत्रिका की संपादक डॉ श्वेता दीप्ति की काव्य संग्रह रिश्तो से भी रूबरू कराती है। मन की अभिव्यक्ति को दर्शाती है। कविताओं के साथ खूबसूरत मुक्तकों को भी आप पढ़ पाएंगे। अपने भावों को अनेक रूपों में श्वेता जी ने अपने हाइकू में भी जगह दी है और उसे आप भी महसूस करेंगे।
इस संग्रह में हर रंग आप को मिलेंगे 82 कविताओं के साथ-साथ 26 मुक्तक 132 शेर, 24 हाइकू इस संग्रह को खूबसूरत बनाती है। आप इस संग्रह को अमेज़न पर रु 295 में ऑर्डर कर मंगा सकते हैं और नेपाल में यह रु 495 है।
यह संग्रह साहित्य जगत में एक विशिष्ट स्थान स्थापित करें। श्वेता दीप्ति जी की सुंदर सार्थक रचनाएं अनवरत चलती रहे। उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं।
मुम्बई

