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आल इंडिया ब्राह्मण संगठन ने मनाया परशुराम जन्मोत्सव


नागपुर। आल इंडिया ब्राह्मण संगठन की ओर से अक्षय तृतीया पर आनलाइन गूगलमीट पर परशुराम जन्मोत्सव को बहुत ही सुन्दर रुप में काफी अच्छी उपस्थित में नागपुर महाराष्ट्र की शाखा "परशुराम वाटिका' दर्शाया मनाया गया। आज जो कोरोना के कहर में मानसिक स्थिति विकृत सी हो गई है उस भंयकर स्थिती में ईश्वरीय भक्ति पूर्ण कार्यक्रम मन को कुछ समय शांति देते हैं यह अनुभव हुआ। 

अक्षय तृतीया जिसका कभी नाश नहीं होता, शुभ दिन होता है, एक मन में सब के आत्मविश्वास बढ़ा गया यह कार्यक्रम। काफी सुंदर प्रस्तुतियां रही, पहले गुजरात से आते संगठन के महासचिव विपुल भाई व मीनाक्षी उपाध्या ने परशुराम की तस्वीर को माल्यार्पण कर ज्योत को प्रज्जवलित कर अपने उद्बोधन से ब्राह्मणत्व व परशुराम पर कहा। बाद में मुंबई से आए विपिन मिश्रा ने अपने विचार प्रकट किए। 

कार्यक्रम का संचालन आल इंडिया ब्राह्मण संगठन नागपुर महाराष्ट्र शाखा परशुराम वाटिका की अध्यक्ष रति चौबे  कर रही थी। आरंभ परशुरामजी के एक प्रसंग को लेकर नाटिका के रुप में सुंदर ढंग से एक छोटे सुंदर बालक ने परशुराम बन माता रेणुका का सिर काटा। पिता के आदेश पर उत्कर्ष चौबे का अभिनय सटीक रहा। रेणुका के रूप में नैनिका चौबै ने भावात्मक रुप से बोल नाटिका को बहुत ही ह्दरग्राही बनाया। फिर परशुरामजी के सम्पूर्ण जीवन चरित्र की संगीतमय गाथा ममता शर्मा कोषाध्यक्ष, हेमंत शर्मा ने प्रस्तुत कर सभी से वाह वाही लूटी। 

प्रंसगो के लेकर उषा हिंदारिया ने सबके दिलों को जीता। वो खुद भगुवा टोपी व वस्त्रों में सबको लुभा गई और उसके बाद जब नृत्य के रुप में मीना तिवारी ने तो वातावरण ही बदल दिया। परशुराम के सभी सुंदर अवतार को प्रस्तुत कर कानों को परशुराम का मीठा भजन सुरीली, सधी आवाज में शशी भार्गव 'प्रज्ञा' का सुनाई पड़ा तो सभी मुग्ध हुए। भारती शर्मा का भी स्वरचित वो सुंदर भजन मन लुभा गया। माहोल‌ बदला फिर सूरत से आई वदंना ने श्री परशुराम के ज्ञानवर्धक प्रसंगो को बताया। 

रायपुर छत्तीसगढ़ से शिवकांत त्रिपाठी ने परशुरामजी के जीवन चरित्र पर बहुत ही सारगर्भित विचारों को प्रस्तुत किये। तथा जिस उत्साह व कर्मठता से वे कार्य कर रहे उसकी चर्चा की। अब डा शीला भार्गव "मीरा शोध' की लेखिका ने भी परशुराम के बिषय में सारगर्भित बोला। उपाध्यक्ष रेखा पांडे ने परशुराम चालीसा सुनाकर भारती रस की धारा ही बहा दी। 

अंत में रति चौबे ने अपने ब्राह्मण पर विचार प्रकट करते कहा परशुरामजी हमारे ईष्ठ देव हैं और मैं ब्राह्मण हूं, अपना गौरव ही मानती। हम दयनीय नहीं हमारे तेवर बदले तो भूचाल जावे। सब एक स्वर  में बोले मैं ब्राह्मण हूं, था और रहूंगा, मेरा ही वाक्य लिखा है गीता के श्लोकों मैं, सूरज के आलोको में, मेरे ही कांधों पर टिकी है विश्वशांति की आशाएं। अंत में तिरुपति के राजशेखर ने सुंदर गीत की प्रस्तुति करतै आभार आरती करते प्रकट किया। 

इस अवसर पर लखनऊ के उत्कर्ष साहित्य प्रतिष्ठान के एवं उत्तराखंड प्रतिनिधि मंच के अध्यक्ष  हरीश उपाध्याय, गरिमा त्रिपाठी, पुष्पा पाण्डेय, शुभम मिश्रा, सौम्यता तिवारी, मनीष आदि दर्शक जो हैदराबाद, केरल से आए अमित शिल्पा जोशी और भीष्ठ बर्नर, ब्राह्मण मित्र, सौनल, चेतन शर्मा, ममता शर्मा, पुनीत चौबे, शारदा जयंती, लगभग 18 राज्य से ब्राह्मण प्रतिनिधि इस अवसर पर उपस्थित रहे। अंत में राष्ट्रीय प्रवक्ता सौ बबीता दुबे रायपुर,ने एकता का संदेश दिया और माहसचिव विपुल ने सभी को संगठित हो आगे बढ़ने को जागृत किया।

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