वैश्विक भाईचारा ही विश्व समन्वय साहित्य परिवार का उद्देश्य : डॉ. बलराम
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विश्व समन्वय साहित्य परिवार का विचार व काव्य गोष्ठी
मुंबई।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारत की स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के उपलक्ष
में विश्व समन्वय साहित्य परिवार (वर्ल्ड हारमोनी ऑर्गेनाइजेशन फॉर
लिटरेचर) द्वारा ऑनलाइन विचार व काव्य गोष्ठी का आयोजन मुंबई की जानी मानी
लेखिका व कवयित्री शशि 'दीप' के संयोजन में सम्पन्न हुआ।
इस गोष्ठी का विषय
'देश भक्ति' था जिसमें मुंबई की वरिष्ठ कवयित्री,आर्ट ऑफ़ लिविंग टीचर
श्रीमती मंजू चंद ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की व संस्था से लंबे समय
से जुड़े बिलासपुर के वरिष्ठ साहित्यकार, राघवेन्द्र दूबे, विशिष्ठ अतिथि
रहे। कार्यक्रम का संचालन बिलासपुर, मुंबई की वरिष्ठ साहित्यकार, समाजसेवी
कोकिल कंठ डाॅ प्रीति प्रसाद ने किया।
कार्यक्रम का
आरम्भ शशि दीप द्वारा सरस्वती वंदन से हुआ। उसके बाद सर्वप्रथम संस्थापक
अध्यक्ष डॉ बलराम टहिलियानी सचदेव ने संस्था का परिचय देते हुए कहा कि यह
वस्तुतः एक विश्व परिवार है जिसका धर्म मानवता तथा जाति राष्ट्रीयता होगी
तथा हम सब मिलकर साहित्य, संस्कृति, कला, विज्ञान व आध्यात्म के
प्रचार-प्रसार में सहभागी बनेंगे। विश्व बंधुत्व व समन्वय को आगे बढ़ाएंगे।
कार्यक्रम
की अध्यक्षता कर रहे संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ देवधर महंत ने कहा
'साहित्य सत्य, शिव और सुन्दर होता है। विश्व समन्वय परिवार की संस्थापना
इसी पवित्र उद्देश्य की पूर्ति के लिए की गई। हमारा सदैव प्रयास रहेगा कि
विश्व बंधुत्व, एकता और समन्वय की प्रेरणा देनेवाली, मानवीय मूल्यों की
संवाहिका रचनाओं, भावनाओं और विचारों के माध्यम से हम लक्ष्योन्मुख हों।
मुख्य अतिथि श्रीमती मंजू चंद ने संस्था के महान उद्देश्यों की भूरि - भूरि
प्रशंशा करते हुए, वीर शहीदों के बलिदानों की गाथा व वीर जवानों के प्रति
कृतज्ञता पर आधारित कविता पाठ किया। विशिष्ट अतिथि राघवेन्द्र दूबे ने 26
वर्ष पुरानी इस संस्था को इस मुकाम तक पहुंचाने में डाॅ बलराम के समर्पण को
नमन करते हुए विश्व पटल पर इसके विस्तार के लिए डिजिटल प्रभारी शशि दीप की
सराहना की तथा इस पहल के लिए समस्त समन्वय साहित्य परिवार को बधाई प्रेषित
दी।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में काव्यगोष्ठी के तहत
देश के विभिन्न शहरों से सम्मिलित हुए साहित्यकारों ने अपनी उत्कृष्ट
प्रस्तुति द्वारा तिरंगे से सराबोर आभासी पटल को जीवंत कर दिया। इस गोष्ठी
में हैदराबाद से मनीष पाण्डे, देहरादून से सावी शर्मा, मुंगेली से राकेश
गुप्त 'निर्मल', चकरभाठा से सुनील वर्मा, भिलाई से जानीमानी लोक गायिका
श्रीमती रजनी रजक, रतनपुर से जनकराम साहू, खैरागढ़ से डाॅ मकसूद अहमद,
कोरबा से संतोषी महंत 'श्रद्धा' के अलावा बिलासपुर से रेणु बाजपेयी, आशा
चंद्राकर, गीता नायक, सुरेन्द्र तिवारी, दिनेश्वर जाधव व पूर्णिमा तिवारी व
मयंक दुबे की सहभागिता रही।
कुछ उत्साही साहित्यसाधकों को तकनीकी दिक्कतों
के कारण न जुड़ पाने से थोड़ी निराशा हुई, इसमें जानीमानी कवयित्री वासंती
वर्मा, बिलासपुर की सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सुनीता मिश्रा, राजेश
सोनार, धनेश्वरी सोनी व ख्यातिलब्ध साहित्यकार डॉ गोपाल चंद्र मुखर्जी थे।
लेकिन उनके वीडियोस, ऑडिओस के माध्यम से सभी प्रस्तुतियों का आनंद लिया
गया।
इस अविस्मरणीय अवसर पर, कार्यक्रम के सफल
संचालन व कुशल संयोजन के लिए, अतिथियों व सहभागिता देने वाले कवि -
कवयित्रियों ने शशि दीप व डाॅ प्रीति प्रसाद की बेहद प्रशंसा की।