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सीधे ब्लड बैंक जाकर रक्तदान करें : सतीजा

                                             


प्लेटलेट्स का जबरदस्त अभाव  
                                                                     

नागपुर। संतरानगरी में डेंगू के बढ़ते प्रकोप के बीच प्लेटलेट्स की मांग बेतहाशा बढ़ रही है. मरीज के रिश्तेदार दर दर भटक रहे हैं और तमाम ब्लड सेंटर (बैंक) विवश हैं. रक्तदान के क्षेत्र में सेवारत नरेंद्र सतीजा ने बताया कि प्लेटलेट्स की संख्या 20 हजार से कम होते ही मरीज को इसकी आवश्यकता होती है. जाहिर है प्लेटलेट्स रक्त से ही निकलता है और रक्त का कोई विकल्प नहीं है. ऐसे में एकमात्र सहारा रक्तदाता ही होते हैं. 

विशेष बात यह कि रक्तदान शिविरों का आयोजन तो हो रहा है लेकिन प्लेटलेट्स की उम्र मात्र 3 दिन की होती है. ऐसी परिस्थिति में जरूरी है कि जरूरत पड़ने पर रक्तदाता से संपर्क कर सीधे ब्लड बैंक में रक्तदान करवाया जाय क्योंकि केवल 3 घंटे में प्लेटलेट्स तैयार हो जाते हैं. आजकल रक्तदान शिविरों में रक्तदान की संख्या पर जोर दिया जाता है जो कि अव्यवहारिक है. 

एक बड़ा शिविर करने की बजाय छोटे छोटे शिविर किये जाएं ताकि रक्त की आपूर्ति नियमित रूप से होती रहे. प्लेटलेट्स की पूर्ति 2 प्रकार से की जाती है. एक तो सिंगल डोनर प्लेटलेट्स अर्थात एस डी पी होती है जो एक ही रक्तदाता से चढ़ाई जाती है. इस प्रक्रिया में 2 घंटे से अधिक समय लगता है और खर्च भी 10 हजार रुपये से अधिक आता है. दूसरी विधि रैंडम डोनर प्लेटलेट्स अर्थात आर डी पी की है जिसमें 4-5  रक्तदाता से एकत्रित रक्त से प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते हैं. 

जाहिर है कि इसमें समय काफी कम लगता है और लगभग 3 हजार रुपये में काम हो जाता है. बेशक परिस्थिति गंभीर है लेकिन रक्तदान के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है. आखिर रक्तदाता जीवनदाता है. जरूरत पड़ने पर रक्तदान करने जरुर जाएं ताकि रक्त अथवा प्लेटलेट्स के अभाव में किसी को जान न गंवानी पड़े.

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