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कवि कल्पना को यथार्थ से जोड़ता है : डॉ वंदना अग्निहोत्री


नागपुर/पुणे। कवि अपनी कल्पना की उड़ान को यथार्थ से जोड़कर पाठक एवं श्रोताओं को रसास्वादन के लिये प्रेरित करता है। ये विचार डॉ. वंदना अग्निहोत्री, अधिष्ठाता, कला संकाय, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर, मध्य प्रदेश ने वक्तव्य किये। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ प्रदेश की काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में वे अपना उद्बोधन दे रही थी। 

डॉक्टर अग्निहोत्री ने आगे कहा कि आम आदमी जीवन जीता है लेकिन कवि जीवन को भोगते हुए अनुभव भी लेता है। अतः कवि की कविता में निहित रहस्य को भी समझना भी जरूरी है। कवि कर्म समाज का दिशा दिग्दर्शन व मार्गदर्शन भी करता है। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज के सचिव डॉ गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने प्रस्तावना में संस्थान की विभिन्न गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। 

विशिष्ट अतिथि डॉ. सीमा वर्मा, लखनऊ, उ.प्र.ने कवियों की भावनाओं की अभिव्यक्ति में भिन्नता होती है। कवि की कविता भाषा को समृद्ध भी करती है।विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ.शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि कवि कर्म वास्तव में सरल नहीं है। लगन व परिश्रम से कविता जन्म लेती है।
छत्तीसगढ़ काव्य पाठ में कवि एवं कवित्रियों ने अपनी प्रस्तुति दी - छत्तीसगढ़ की वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती किरण लता वैदय की प्रस्तुति -
हिंदी के मुहावरे, बड़े ही बावरे हैं।
खाने-पीने की चीजों से भरे हैं.
कहीं पर फल है तो कहीं आटा-दालें हैं,
कहीं पर मिठाई है, कहीं पर मसाले हैं।
वरिष्ठ कवयित्री डॉक्टर सत्यभामा अडिल की प्रस्तुति है - 
हर भूखंड का अपना स्वप्न
दूसरे के स्वप्न से टकराता है,
टकराहट की ध्वनि से, 
खंडित होता भूखंड।
रायपुर की वरिष्ठ कवयित्री डॉ सुधा वर्मा  ने सुनाया -
आकाश से उतरती
कुछ वाष्पित बूंदे
ओजोन छिद्र को निहारती
हौले होले धरती की ओर उतरती।
श्रीमती शुभा शुक्ला निशा, रायपुर,छत्तीसगढ़ की काव्य पंक्तियां रही -
स्वतंत्रता तो पा ली हमने कद्र ना इसकी जान सके,
शहीदो की शहादत का मर्म ना जान सके।
श्रीमती अनीता मंदिलवार अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़ की प्रस्तुति -
कहते हैं, पुस्तकें हमारी,
सबसे अच्छी मित्र है।
सच भी है, अच्छी पुस्तकें,
हमारे लिए वरदान
साबित होती है।
श्री लक्ष्मीकांत वैष्णव चांपा, छत्तीसगढ़ की कवि थी-
मनलाभ के ये मन के गीत,
गीत म छिपे पिरीत।
पिरीत के ये गीत संगी ,
सब ल पिराये रे।....
कवयित्री सीमा निगम,रायपुर की काव्य पंक्तियाँ रही - 
कर लो किताब से मोहब्बत,
हटा लो अंधेरा किताबों से।
विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज की हिंदी सांसद डॉ मुक्ता कान्हा कौशिक,रायपुर की प्रस्तुति -
हिंदी हमारी मन की अभिव्यक्ति, भावों की अभिव्यक्ति है,
दिल को छू ले जो,
वह हमारी हिंदी है।
कार्यक्रम का प्रारंभ श्री लक्ष्मीकांत वैष्णव की सरस्वती वंदना व स्वागत उद्बोधन से हुआ। कार्यक्रम का संचालक एवं संयोजक डॉ मुक्ता कान्हा कौशिक,रायपुर ने सभी कवि जनों का आभार व्यक्त किया।
साहित्य 8737420042233574805
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