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सामाजिक कार्य के साथ आर्थिक उन्नति भी होना चाहिए- नितिन नखाते


नागपुर : सामाजिक कार्य के साथ आर्थिक उन्नति भी होना चाहिए यह अखिल दिगंबर जैन सैतवाल संस्था के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नितिन नखाते ने विशेष साक्षात्कार में कही.
   

पुलक मंच परिवार, महावीर को ऑप हाऊसिंग सोसाइटी, अमरस्वरूप फाऊंडेशन द्वारा पर्युषण महापर्व पर ऑनलाइन फेसबुक लाइव साक्षात्कार आयोजन किया था. संचालनकर्ता मनोज बंड ने अनेक सवालों पर नितिन नखाते से चर्चा की. नितिन नखाते ने एक सवाल के जवाब में कहा सभी संस्थाओं की अपने अपने क्षेत्र में कार्य करने की अपनी पहचान हैं. सभी संस्थाएं एक होकर काम करें तो ऊंचाई को प्राप्त कर सकते हैं. नई नई कल्पनाओं को साकार करने  की क्षमता होना चाहिए. 

हमारे युवाओं की सामाजिक कार्य के साथ आर्थिक उन्नति भी होना चाहिए. व्यापार और उद्योग से रोजगार मिले ऐसा हमारा प्रयास शुरू हैं. नशीब के साथ कर्म भी होना चाहिए. दो घंटे समाजसेवा के लिए और आठ घंटे जीवन निर्वाह के लिए कार्य करें. पिछले वर्ष से मेरे कुछ विचार भी मैंने अखिल दिगंबर जैन सैतवाल संस्था के राष्ट्रीय कार्यकारिणी तक पहुंचाए. 

हमने सैतवाल जैन समाज के व्यावसायिक लोगों का संगठन आचार्यश्री ट्रेड आर्गनाइजेशन का गठन किया. उस संगठन के अनेक लोगों को लाभ हुआ. अनेक लोगों ने औद्योगिक इकाइयां प्रारंभ की हैं. नागपुर का सैतवाल समाज बड़ा हैं, राष्ट्रीय पदाधिकारियों के कुछ सपने थे इसलिये संगठन में मुझे शामिल किया.

जिस प्रकार मकान बनता हैं तो आर्किटेक्ट पूरे मकान का प्लान बनाता हैं और हमें पता नहीं रहता मकान कैसे बनेगा लेकिन आर्किटेक्ट को पता रहता हैं उसी प्रकार हमने आचार्यश्री गुप्तिनंदीजी गुरूदेव की 2018 में चातुर्मास की स्वीकृति मिलने के बाद सकल जैन समाज के सहयोग से चातुर्मास का नियोजन किया. चातुर्मास में समाज और सभी संस्थाओं ने सहयोग किया और हमें समाज की एकता दिखी. चातुर्मास भी ऐतिहासिक हुआ और विधान के आयोजन में हमें अच्छी सफलता मिली. गुरूदेव के आगवानी का यादगार क्षण रहा जब पुलक मंच परिवार ने गांधी पुतले के पास चांदी की थाली में गुरूदेव अगवानी की तो वरुण राजा भी बरस पडे, हम उस क्षण को नहीं भूल सकते.
   

बचपन में हमारे माता पिता ने धार्मिक पाठशाला में भेजा, पाठशाला के माध्यम से हमें धर्म का ज्ञान मिलता रहा. अभी के युवाओं में पाठशाला में मिलनेवाले ज्ञान की कमी हैं. आजकल लोग अपने बच्चों को धर्म ज्ञान की ओर जोड़ रहे हैं. पुलक मंच परिवार और समाज की अन्य संस्थाएं इस ओर कार्य कर रही हैं. बचपन से धार्मिक आस्था जगायी तो जीवन के अंत तक रहती हैं. 

हमारा सौभाग्य यह हैं कि गुरु हमें मिलते हैं और गुरु हमें धर्म का सही रास्ता दिखाते हैं. गुरु हमें मार्गदर्शन करते हैं और कर्तव्यों के प्रति हमें सचेत करते हैं, हम सक्षम रहते हैं. लक्ष्मी सरस्वती जैन धर्म के सिद्धांत में हैं, सिद्धांत दिल से पालन करता हैं, ग्रंथ का आधार बनकर पालते हैं तो सरस्वती मिलती हैं. गुरु के आदेश का पालन किया तो लक्ष्मी और सरस्वती प्राप्त होती हैं.
    

कार्यक्रम के प्रारंभ में दीप प्रज्ज्वलन नितिन नखाते, मनोज सावलकर, राजुल सावलकर ने किया. मंगलाचरण संपदा राजने ने किया. मंगल उदबोधन प्रा. उमेशचंद्र सरोदय ने दिया. भजन सुरमणि श्यामकुमार जैन, व्हायोलिन वादन अजय वेखंडे ने किया. समारोह का संचालन प्रिया पंकज पोहरे ने किया.

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