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विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज का भौतिक रजत समारोह



भारतीय पर्वोत्सव राष्ट्रीय चेतना व एकता के प्रतीक हैं : डॉ. अनुसूया अग्रवाल

नागपुर/पुणे। भारतीय त्योहार तथा पर्वोत्सव मनाने के पीछे वैज्ञानिकता का भाव है तथा ये पर्वोत्सव हमारी राष्ट्रीय चेतना व एकता के प्रतीक है। 

इस आशय का प्रतिपादन डॉ. अनुसूया अग्रवाल, अध्यक्ष, हिंदी विभाग, शासकीय महाप्रभु वल्लभाचार्य, महाविद्यालय, महासमुंद, छत्तीसगढ़ ने किया। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज के प्रयागराज उत्तर प्रदेश में आयोजित द्विदिवशीय भौतिक रजत समारोह में परिचर्चा में वे बोल रही थी।  

परिचर्चा का विषय था - 'भारतीय त्यौहार एवं उनकी वैज्ञानिकता'। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने परिचर्चा की अध्यक्षता की। 

डॉ. अग्रवाल ने आगे कहा कि प्राकृतिक उपादान हमें प्रेरित करते हैं, इसलिए भारतीय संस्कृति में सूर्य, चंद्र, नदी, पहाड़, पेड़- पौधों की निरंतर पूजा पर्वोत्सव के उपलक्ष में होती है। ये पर्वोत्सव हमारी बौद्धिक चेतना व आंतरिक ऊर्जा को परिपुष्ट करते हैं।
      
श्री. ओम प्रकाश त्रिपाठी, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश ने कहा कि हमारी प्रकृति एवं प्राकृतिक वस्तुएं मानव जीवन के लिए संजीवनी है। हमारे समस्त पर्व मानव और प्रकृति के मध्य अन्योन्याश्रित संबंध दर्शाते हैं।
      
प्रोफेसर डॉ. सुधा सिन्हा, पटना, बिहार ने कहा कि, भारतीय त्योहार अपनी वैज्ञानिकता सिद्धता के साथ जनमानस में सौहार्द की भावना निर्माण करते हैं। वह हमें आध्यात्मिक बनाते हैं।
     
डॉ. विनय कुमार पाठक,  पूर्वाध्यक्ष, राजभाषा आयोग, छत्तीसगढ़, बिलासपुर ने कहा कि भारतीय त्योहार वैज्ञानिकता से युक्त है, जो प्रकृति से परिपूर्णता बनाए हुए जीवन दर्शन को पुष्ट करते हैं।
    
प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने अध्यक्षीय समापन में कहा कि, भारतीय त्योहार पूरे विश्व में मनाए जाते हैं। इन त्योहारों के उपलक्ष्य में पारस्परिक रूप में जुड़ते हुए हम हर्षोल्लास सहित त्यौहार मनाने के साथ भारतीय संस्कृति का पालन भी करते हैं। 

प्रारंभ में संस्थान के सचिव डॉ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश ने परिचर्चा के विषय की प्रस्तावना में विषय के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
     
परिचर्चा में डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक, विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, हिंदी सांसद रायपुर छत्तीसगढ़, डॉ. वंदना श्रीवास्तव, लखनऊ, डॉ. पूर्णिमा मालवीय, प्रयागराज, डॉ. नूपुर मालवीय, प्रयागराज सहित अनेक गणमान्य की उपस्थिति रही। मंच संचालन डॉ वंदना श्रीवास्तव, लखनौ तथा प्रा. मधु शंखधर 'स्वतंत्र', प्रयागराज ने किया।
साहित्य 9035114932834487878
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