आने वाला पल.. एक सुरीली शाम
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नागपुर। विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन का उपक्रम उभरते सितारे, जो कि ऑफलाइन शुरू हुआ है.
मोरभवन के उत्कर्ष सभागृह में जहां बच्चे आने को बहुत बेताब थे वहीं तेज बारिश में भी नन्हे बाल कलाकार इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल हुए.
कोरोना के इस पेंडेंन्मिक समय में सभी नवोदित कलाकार अपने अपने परिवार जनों के साथ जिन पलों को बिताए हैं,
उन लम्हों की खट्टी मीठी यादों के साथ बच्चों ने सुखद अनुभूति से भरा आने वाला पल खुशियां लेकर आए, ऐसी उम्मीद से सराबोर एक सुरीली शाम में दिल से अपनी प्रस्तुतियां दी.
जिसमें गायन, वादन और नृत्य की तीनों शैली शानदार रही. सबसे पहले एकल और ग्रुप डांस में कु. संस्कृति कपाले, माही भोतमांगे, कार्तिक बीजवे, सौम्य शेंडे, रोशनी बांम्बल, कृष्णा इरपाचे, दीया इरपाचे, हितेश डहाके, चंदा डहाके, दिशांत महामला और दक्ष बोकड़े ने दिलकश नृत्य का प्रदर्शन किया.
किमया नन्हई, वंशिका नाईक, शेख अरहान, प्रीति गजपूरे, प्रियाली देशपांडे, चेतश्री डाहाके , साना गटपायले, सुमित चक्रे, मंजिरी पौनीकर, कुंदा खापेकर, कमल मोहाड़ीकर, शेख आजम, योगिता कांबळे, रविंद्र ठाकुर, सूरज बांम्बल और अनिरुद्ध खडसे इन्होंने बहुत ही खूबसूरत गीतों की प्रस्तुतियां दी.
कीबोर्ड बजाते हुए विराज ठाकुर और जियान आहूजा ने सुंदर गीत सुनाए. नवोदित बाल कलाकारों को प्रोफेसर लिपिका चक्रवर्ती, देवेंद्र काळे, बाबा खान, संतोष बुधराजा, श्रद्धा चिंचोलकर, राघव रुंगटा ने बहुत सराहा.
कार्यक्रम में सहयोग वैशाली मदारे, घनश्याम नन्हई, रमेश अय्यर ने किया. कार्यक्रम का संचालन युवराज चौधरी ने किया.