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हिन्दी भाषा ही विश्व की भाषा : जय वर्मा


नागपुर/पुणे। सर्व गुण संपन्न हिंदी भाषा ही वर्तमान में निसंदेह विश्व की भाषा बन चूकी है इस आशय का प्रतिपादन इंग्लैंड की सुप्रसिद्ध भारतीय साहित्यकार श्रीमती जय वर्मा ने किया।

महाराष्ट्र राज्य कनिष्ठ महाविद्यालय हिंदी अध्यापक संघ औरंगाबाद विभाग द्वारा विश्वस्तर पर हिन्दी भाषा और साहित्य इस विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय आभासी संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में उद्बोधन दे रही थी। गोष्ठी की अध्यक्षता महाराष्ट्र राज्य कनिष्ठ महाविद्यालय हिंदी अध्यापक संघ के अध्यक्ष डाॅ मिलिंद कांबले ने की, जय वर्मा ने आगे कहा कि भारत की हिंदी भाषा इंग्लैंड में आज रोजगार की भाषा भी बन चूकीहैं। 

हिंदी भाषा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास हिंदी साहित्यकारो के साथ प्रवासी भारतीय साहित्यकारों ने भी किया है, परिणामतः हिंदी को विश्व मंच पर लाने मे प्रवासी भारतीयों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के अध्यक्ष महासंघ के अध्यक्ष डाॅ. मिलिंद कांबले ने अपने अध्यक्षीय समापन मे कहा कि वैश्विक स्तर पर हिन्दी भाषा  मे साहित्यिक रचना अत्यधिक मात्रा मे हो चूकी है। इसलिए देश - विदेश के लोग हिंदी सीखने और पढ़ने मे रुचि ले रहे है। 

इस गोष्ठी में विशेष उपस्थिति प्रा. रेवणनाथ कर्डिले (राज्यसचिव) सुंदर लोंढे (राज्य कार्याध्यक्ष) इनकी थी। इस अंतर्राष्ट्रीय आभासी गोष्ठी मे महाराष्ट्र के लगभग 200 हिन्दी विषय के अध्यापक (कनिष्ठ महाविद्यालय) पटल पर जुड़कर अपनी सहभागिता दर्शायी। जिनमें डाॅ. वंदना पावसकर (मुंबई) प्रा. नंदा गायकवाड (कोल्हापूर) प्रा. संजय पवार (पुणे), प्रा.सुदाम पाटिल (नाशिक), डाॅ. विनोद डोमकावळे (नागपुर) प्रा. तसनीम वोरा (आमरावती) प्रा. मरतुले (लातुर), प्रा.मंगल ठाकुर, प्रा.पी.डी.घुगे, प्रा. क्षमा करजगावकर, डाॅ. आम्रपाली कस्बे, प्रा. दर्शना बोरकर, प्रा. पायल जैस्वाल, प्रा. अनिता वानखेडे, प्रा. निता तंगडपल्लीवार, प्रा.ज्योति शर्मा, प्रा.सुवर्णा मोरे (रायगड) प्रा. विद्याधर पाटील रायगड, प्रा. तानाजी पाटील (सातारा), प्रा. संजय पाटील (नदुरबार) प्रा.जावेद शेख, प्रा सुनिल जैस्वाल, ज्ञानेश्वर गोराडे, कैलास माळी, प्रा.संजय आरण्ये, प्रा.चारू दाभोलकर पुणे, प्रा. किंजल मेहता, डाॅ.गोपाल बाहेती, 

प्रा.विजय गवळी (लातुर), प्रा. वैशाली मद्दिवार, प्रा.विजय कच्छवे, प्रा ज्योती चिलवंत, प्रा.परमेश्वर पवार, प्रा शिवाजी मांदळे, प्रा. राजेंद्र सोनवणे, प्रा श्रीकांत कुलकर्णी, प्रा.शेख इस्माईल, प्रा.नाल्टे, प्रा.वायाळ, डाॅ.स्मिता आवस्थी, प्रा. पंडीत राठोड, प्रा. रामेश्वर बनकर, प्रा. ज्ञानेश्वर गोराडे, मच्छिंद्र भिसे (सातारा) आदि अध्यापक  उपस्थित थे। इस कार्यक्रम का आयोजन प्रा. डाॅ. राजकुमार कांबळे (जेवरीकर) औरंगाबाद विभाग अध्यक्ष इन्होंने किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने मे प्रा. गोरख सूर्यवंशी (औरंगाबाद) प्रा. अरुण आहेर (जालना) प्रा. पंजाबराव येडे (बीड) प्रा. शिवाजी लिपने (परभणी) प्रा. सुरेद्रकुमार साहू (हिंगोली) इनका योगदान रहा। प्रमुख अतिथि का स्वागत डाॅ.विद्या उपाध्याय ने किया और प्रा. हेमलता लखमल ने परिचय प्रस्तुत किया। प्रास्ताविक विभागीय अध्यक्ष डाॅ. राजकुमार कांबळे ने दिया। कार्यक्रम का सफल सूत्रसंचालन प्रा. डाॅ.माया चव्हाण  ने किया और आभार ज्ञापन प्रा. गोरख सुर्यवंशी ने किया।

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