सरल और मृदु स्वभाव के थे डॉ. समीर सय्यद : गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी
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नागपुर/पुणे। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ. प्र. के सक्रिय आजीवन सदस्य डॉ. समीर गुलाब सय्यद अत्यंत सरल और मृदु स्वभाव के थे। इसलिए उन्हे चाहनेवालों की संख्या कम नहीं थी। ये उद्गार विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ. प्र. के सचिव डॉ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने व्यक्त किए।
डॉ. समीर सय्यद के आकस्मिक दुःखद निधन पर विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ. प्र. द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वे बोल रहे थे। डॉ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने आगे कहा कि डॉ. समीर सय्यद एक अच्छे वक्ता, अध्यापक तथा उत्तम संगठक थे।
डॉ. सुवर्णा जाधव, मुंबई ने कहा कि डॉ. समीर सय्यद विश्व हिंदी साहित्य संस्थान में निरंतर याद आते रहेंगे। राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के महासचिव डॉ. प्रभु चौधरी ने कहा कि डॉ. सय्यद आभासी सभी गोष्ठियों में जुडकर हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे थे।
विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मुहम्मद शेख, पुणे महाराष्ट्र ने कहा कि डॉ. समीर सय्यद 1982 से अर्थात छात्र जीवन से निरंतर मेरे सम्पर्क में थे। 56 वर्ष के अपने जीवन में वे हमेशा हर क्षेत्र में सक्रिय रहे। अध्ययन, अध्यापन तथा शोध के क्षेत्र में डॉ. समीर सुपरिचित थे। आजीवन संघर्षरत उनके व्यक्तित्व ने प्राप्त परिस्थितियों को हमेशा हराया है।
डॉ. अशोक द्रोपद गायकवाड, अहमदनगर ने डॉ. समीर के शैक्षिक व अध्यापकीय जीवन को उजागर करते हुए कहा कि डॉ. समीर सय्यद सदा हंसमुख तथा प्रसन्नचित्त रहते थे। डॉ. भरत त्र्यंबक शेणकर, राजूर ने कहा कि डॉ. समीर का चुंबकीय व्यक्तित्व था। डॉ. दत्तात्रय टिळेकर, ओतूर, पुणे ने कहा कि डॉ. समीर का इस तरह अचानक चले जाना हम सबके लिए बडा आघात है।
प्रा. पोपटराव आवटे, नेवासा ने कहा कि डॉ. समीर के साथ उनके सहपाठी जीवन के अनुभव निरंतर याद आते रहेंगे। डॉ. बाळासाहेब बाचकर, बेलापुर ने कहा कि विश्वास नहीं होता कि अब समीर हमारे बीच नहीं रहे। उनका सक्रिय और गतिशिल व्यक्तित्व सब के लिए प्रेरक रहा। श्रीमती डॉ. ऐनूर इनामदार ने कहा कि हिंदी अध्ययन और अध्यापन के क्षेत्र में डॉ. सय्यद जी की बडी ख्याति थी।
इस अवसर पर डॉ. राज मुहम्मद शेख बाणेश्वर नगर, डॉ. रुपाली चौधरी, जलगाँव, डॉ. मेदिनी अंजनीकर, मुंबई, डॉ. शौकत फकिर, सोनई, डॉ. अविनाश साळवे, सोनई, प्रा. बालकिसन धूत, एरंडोल, डॉ. संजीवनी भालसिंग-मुळे, नेवासा, प्रा. जमील शेख, ढवळपुरी ने अपनी संवेदना सहित श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा का संयोजन व संचालन प्रा. रोहिणी बालचंद डावरे, अकोले, महाराष्ट्र ने किया।
अंत में दो मिनट का मौन धारण करके डॉ. समीर सय्यद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
