नोबेल पुरस्कार के लिए सर्पमित्र वनिता बोराडे को मिला नामांकन
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नागपुर/मेहकर। महाराष्ट्र राज्य के राज्यपाल महामहिम भगतसिंह कोश्यारी द्वारा राजभवन मुंबई मे अंतराष्ट्रीय महिला दिन पर 'राष्ट्रीय सेवा सम्मान पुरस्कार' प्रदान करके किया गौरव।
विश्व स्तर पर मानवता और विश्व शांति के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार नोबेल शांति पुरस्कार इस वर्ष दिसम्बर 2021 मे दिया जानेवाला है। इसलिये दुनियाभर से विविध क्षेत्र मे विश्व कल्याणकारी कार्य करने वाले वैज्ञानिक, समाजसेवक, पर्यावरणवादी, साहित्यिक और संशोधको को नामांकन प्राप्त हुआ है।
भारत मे पहला नोबेल पुरस्कार स्वातंत्र्यपूर्व काल में आंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदर्श मानवीय कल्याणकारी मुल्य प्रस्थापित करणे वाली साहित्यकृती 'गीतांजली' के लिए थोर देशभक्त, कवी, रचनाकार, साहित्यिक, रवींद्रनाथ टागोर जी को दिया गया था। उनके बाद वनस्पती संशोधक जगदीश चंद्र बोस और डॉ. सी.व्हि. रमण (भौतिकशास्त्रज्ञ) को उनके रमण इफेक्ट संशोधन के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया था। पश्च्यात अर्थशास्त्रज्ञ अमर्त्य सेन और फिर विश्वशांती नोबेल पुरस्कार मदर टेरेसा को उनके त्यागमय जिवन और अनाथ बालको की सेवा सुश्रृषा के लिए दिया गया था। 2007 मे यह पुरस्कार बांगलादेश मे अर्थक्रांती लाने वाले समाजसेवक मोहम्मद युनुस को दिया गया था। उनके पश्चात नोबेल पुरस्कार 2014 को भारत और पाकिस्तान के दो महान समाजसेवक, बाल हक्क सुरक्षा के लिए काम करने वाले कैलाश सत्यार्थी और मलाला युसूफर्ज़इ को विभाजित करके दिया गया।
पिछले 7 वर्षो मे भारत और एशिया मे यह नामांकन किसी भी देश को नही मिला जबकी इस वर्ष 2021 के लिए भारत माँ की सच्ची सुपेत्री, निडर और साहसी, शूरतेजस्विनी कन्या, विश्व विक्रम प्रस्थापित करनेवाली, विश्व की प्रथम महिला सर्परक्षक, सर्पमित्र, कुमारी. वनिता बोराडे को उनकी पर्यावरणीय, सर्पसेवा और वन्यजीव संरक्षण कार्य के लिए विश्व शांती नोबेल पुरस्कार (नोबेल पिस प्राईज 2021) के लिए अधिकृत नामांकन प्राप्त हुआ है। हम सभी भारतीयो के लिए यह बडे गौरव की बात है।
मदर टेरसा के बाद शांती के नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकीत होनेवाली सर्पमित्र वनिता बोराडे द्वितीय भारतीय महीला है। पिछले दो वर्ष से पुरा विश्व कोरोना महामारी से लढ रहा है, इसपर विजयी होने के लिए पर्यावरण और प्राणवायू सुरक्षा अनिवार्य है। वन, वन्यजीव, निसर्ग एवं पर्यावरण हमारे सहजीवन के लिए नितांत आवश्यक है। सर्पमित्र, वनिता बोराडे ने अपणे पर्यावरणीय वन्यजीव संरक्षण,संवर्धन और संशोधन सर्पसेवा कार्य से पुरे विश्व को "पर्यावरण ही प्राणसंजीवन है !" यह विश्व कल्याणकारी संदेश दिया है।
उन्होने 51000 से अधिक सापो को लोकवस्ती से पकडकर जंगल मे प्राकृतिक अधिवास मे छोडकर जीवनदान दिया है। इससे सांपो को और लोगो को दोनो को भी जीवनदान मिला है। वन्यजीव और मानव प्राणी सुरक्षा के लिए यह कार्य महत्त्वपूर्ण साबित हुआ है। 51000 से अधिक सांपो को जान जोखिम मे डालकर पकडना और उससे लोगो को जीवनदान देकर विश्वविक्रम प्रस्थापित करना यह कार्य करनेवाली वनिता बोराडे विश्व की पहली महिला सर्परक्षक घोषित हुई है।
महाराष्ट्र बुक ऑफ रेकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ रेकॉर्ड, एशिया बुक ऑफ रेकॉर्ड, लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड और गिनीज वर्ल्ड रेकॉर्ड इन सभी ने इस कामगिरी को विश्व रेकॉर्ड बुक मे दर्ज किया है।
भारत सरकार की डाक सेवा विभाग ने टपाल टिकट (पोस्टल स्टॅम्प) वनिता बोराडे के छायाचित्र और नामनिर्देश से उनके सन्मानार्थ जारी किया है। वर्ल्ड कॉस्टुटिशन अॅन्ड पारल्मेंट असोशियन, यु.एस.ए .(अमेरिका).
पिफल फॉर अॅनीमल, नयी दिल्ली.
यु.एन ७५ हेल्थ प्लॅनेट.
नॅशनल एरोनॉटीक्स ॲन्ड स्पेस ॲडमिनीस्ट्रेशन.
एम.एन.एफ. फाऊंडेशन.
सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी ग्रुप.
जैसी राष्ट्रीय - अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण हेतु कार्य करनेवाली विविध संस्थाओ की वनिता आजीवन सदस्य है।
महाराष्ट्र राज्य शासन और केंद्र शासन के सभी कानूनी निर्देशो का पालन करके सर्पमित्र वनिता वन्यजीव और सापो के प्रति जनजागरण हेतू शिक्षण-प्रर्शिक्षण कार्यशाला का आयोजन करती है। इससे लोगो मे और नव युवको मे पर्यावरणवादी सर्पमित्र बनकर काम करणे का नया उत्साह संचारित हुआ है। अभी लोग सापो को मारते नही उन्हे बचाने के लिए योगदान देते है। अपनी अनोखे कार्य से सर्पमित्र वनिताने लोगो की सोच सर्प-सोच को वैज्ञानिक दृष्टिकोन से परिचित करके अंधविश्वास को दूर किया है, लोगो का डर भगाकर सर्प-मैत्री भावनाओ को बढाया है।
पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का एक नया पर्व सर्पमित्र वनिता ने शुरू किया है। यह नया पॅटर्न विश्व के लिए रोल-मॉडल बना है। विश्व मे सभी तरफ से इसका अनुकरण हो रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर 33 करोड वृक्ष लगाने की मोहिम मे वनिता का योगदान सर्वोच्च रहा है।महाराष्ट्र राज्य के वनविभाग द्वारा "छत्रपती शिवाजी महाराज वनश्री पुरस्कार" वनिता को आदरपूर्वक प्रदान किया गया है।
सर्पमित्र वनिता बोराडे एक भूमिपुत्र किसान की बेटी है, खेती पर काम करणे वाले आदिवासी मजदूर बच्चो का उन्हे बचपन से ही सानिध्य प्राप्त हुआ, उन्हीसे खेलकूद करते समय वनिता ने सभी आदिवासी जिवन कलाऐ सीख ली। नदीयो मे तैरना, पेड पर चढना, जंगल और पहाड़ो मे दिनभर घुमना, इस से वनिता का बचपन प्राकृतिक अधिवास से जुडकर समृद्ध बन गया। पेड, पशु, पंछी, प्राणी, लता वेलीया, जंगली फुल-फलो का आस्वाद और आनंद लेने वाली वनिता ने बचपन मे ही आगे चलकर इन सभी के विकास और संरक्षण हेतु काम करने का पक्का विचार मन मे ठान किया था, जो आज इस विचार से पिछले 35 सालो से लगातार निस्वार्थ भाव से सेवाकार्य कर रही है, आज इसके लिए ही वनिता ने अपना पुरा जिवन समर्पित किया है।
हमारे संस्कृती और सभ्यता के युग प्रवर्तक, महान क्रांतिकारक बने छत्रपती शिवाजी महाराज के जीवन पर भगवान राम और कृष्ण का प्रभाव था । इसलिए अपने बचपन के साथियो को संग लेकर प्रतिकूल परिस्थितीयो मे उन्होने फौज बनाकर राष्ट्रमाता जिजाऊ के मार्गदर्शन मे नया स्वराज्य प्रस्थापित किया। सर्पमित्र वनिता बोराडे भी राष्ट्रमाता जिजाऊ के नाम से सुविख्यात मातृतीर्थ बुलडाणा जिला की वीर बाला है, गांव मेहकर, जिला बुलडाणा, महाराष्ट्र प्रदेश। राष्ट्रमाता जिजाऊ की आदर्श वीर संस्कारो की विरासत वनिता अपनी सर्पसेवा कार्य से आज भी चला रही है।
आमतौर पर कम बोलने वाली वनिता भविष्य मे आने वाले समय के लिए अपने कार्य द्वारा बहोत कुछ बोल रही है। उनकी आवाज नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी तक पहुंची है। इस की गुंज थोडी हमारे कानो मे भी पहुंचनी चाहिए। हमारे देश मे भी पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिए ठोस प्रयास होने चाहिए। इसके लिए वनिता जैसे पर्यावरणीय सेवाकार्य करनेवाली विशेषज्ञ को विधीमंडल और राज्यसभा मे स्थान देना चाहिए। जिससे इस क्षेत्र मे क्रांतिकारी बदलाव लाने की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी। अपने सोयरे वनचरे प्रतिष्ठान द्वारा सापो के प्रति प्रचार-प्रसार करके पुरे विश्व मे वनिता ने अपने कृती से 'पर्यावरण हि प्राणसंजीवन ! का संदेश दिया है। इस वर्ष का नोबेल शांति पुरस्कार सर्पमित्र वनिता को मिल सकता है।

