व्यंग्य में तंज और कटाक्ष के साथ सरोकार जरूरी है : अनुराग बाजपेयी
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नागपुर। व्यंग्य में तंज और कटाक्ष के साथ सरोकार जरूरी है। यह बात वरिष्ठ व्यंग्यकार अनुराग बाजपेयी ने कही। व्यंग्यधारा की सत्तरवीं ऑनलाइन वीडियो गोष्ठी ‘इस माह के व्यंग्य’ श्रृंखला में अगस्त माह में प्रकाशित व्यंग्य रचनाओं में से कुछ चयनित रचनाओं पर चर्चा का आयोजन किया गया। गोष्ठी में बतौर प्रमुख वक्ता श्री वाजपेयी ने सुरेश कांत के व्यंग्य ‘आपने कितने गड़े मुर्दे उखाड़े’ और सुनील जैन राही के व्यंग्य ‘अच्छा हुआ तुम आ गए’ की समीक्षा की। ‘अच्छा हुआ तुम आ गए’ व्यंग्य की समीक्षा करते हुए कहा कि यह सामाजिक सरोकार से जुड़ी हुई रचना है। लेखक ने वंचित के पक्ष में खड़े होने का साहस किया है।
अफगानिस्तान के घटनाक्रम पर आधारित व्यंग्य में तंज, कटाक्ष के साथ प्रवृत्तियों पर व्यंग्य है। यह जनपक्षीय और अच्छा व्यंग्य है। व्यंग्य की शैली अच्छी है। लेखक अपनी बात कहने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि ‘आपने कितने गड़े मुर्दे उखाड़े’ व्यंग्य राजनीति और नेताओं पर केंद्रित है व्यंग्य में अच्छी टिप्पणियां की गई है, लेकिन पंच और रचना में कसावट की कमी है। यह समसामयिक विषयों पर अच्छा व्यंग्य है।
गोष्ठी की शुरुआत करते हुए विशिष्ट वक्ता व्यंग्यकार अश्विनी कुमार दुबे ने सूर्यदीप कुशवाहा के व्यंग्य 'गांव- शहर पिज्जा लहर' पर चर्चा करते हुए कहा कि लेखक ने सरकार के विकास का थोथापन उजागर किया है। पिज्जा की तरह विकास देखने में बहुत ही अच्छा और सजीला होता है, लेकिन अंदर से फुसफुसा रहता है। इस व्यंग्य की भाषा सधी हुई है और अपने उद्देश्य में सफल है। श्री अश्विनी कुमार दुबे ने डॉ सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त' के व्यंग्य 'रिप्लेसमेंट पॉलिसी की पीड़ा' में लोटा और बाल्टी की प्रेमकथा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह रचना हास्य से शुरू होकर तीखे व्यंग्य पर समाप्त होती है।
विशिष्ट वक्ता व्यंग्यकार राजशेखर चौबे ने बृजेश कानूनगो के व्यंग्य ‘ओलंपिक सपने में आए महादेव का आदेश’ व्यंग्य पर चर्चा करते हुए कहा कि इस व्यंग्य-रचना का स्वरूप बड़ा होने के कारण कुछ बातें अनावश्यक विस्तार दे रही हैं, जिसके कारण रचना पाठकों को बांधने में असफल है। उन्होंने सौरभ जैन की रचना ‘बाजार में त्योहार का प्रोटोकॉल’ की समीक्षा करते हुए कहा कि इस व्यंग्य में बाजारवाद पर प्रहार किया गया है। यह व्यंग्य अच्छा है किन्तु इस रचना का छोटा आकार व्यंग्य को सीमित करता है| बहुत छोटी रचना होने के कारण प्रभावित नहीं कर पाती। रचना में आकर से अधिक सरोकार एवं संप्रेषणीयता को महत्त्व देना चाहिए| वरना एक अच्छी रचना का यही हश्र होगा|
गोष्ठी के आरंभ में वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री रमेश सैनी (जबलपुर) ने हरिशंकर परसाई, शरद जोशी और रवींद्रनाथ त्यागी को व्यंग्य के शिक्षक बताते हुए कहा कि तीनों ने साहित्य में व्यंग्य का सम्मान बढ़ाया है। व्यंग्य में तीनों की भूमिका महत्त्वपूर्ण रही है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि अखबार जगत की बड़ी शक्तियां साहित्य पर आक्रमण कर रही है। यह शक्तियां मीडिया और बाजार को संचालित कर रही है। आज अखबारों में सरोकार की रचनाओं का प्रकाशन लगभग बंद है और व्यंग्यकार भी सरोकारी व्यंग्य लिखने से बच रहे हैं। कोई सिरदर्द लेना नहीं चाहता, जैसा पूर्व व्यंग्यकारों ने लिया। श्री सैनी ने आह्वान किया कि व्यंग्यकार को अपनी बात कहने का साहस दिखाना चाहिए। नफा-नुकसान आधारित लेखन से व्यंग्य का नुकसान हो रहा है।
श्री रामस्वरूप दीक्षित (टीकमगढ़) ने कहा कि व्यंग्य में भाषा और शिल्प के साथ सामाजिक सरोकार भी जरूरी है। व्यंग्यधारा समूह व्यंग्य की बेहतरी की दिशा में हमेशा नए-नए प्रयोग करता रहा है। श्री फारुक आफरीदी (जयपुर) ने कहा कि व्यंग्यधारा समूह का आयोजन बहुत महत्वपूर्ण है। समकालीन व्यंग्य पर चर्चा से हम देख सकते हैं कि हमारी दृष्टि क्या है और हम किस ओर जा रहे हैं। हमारी दृष्टि वैश्विक होनी चाहिए। समय को पढ़ें और अतीत का ज्ञान रखें। उन्होंने किताबों पर भी चर्चा का सुझाव दिया। इस पर श्री रमेश सैनी ने कहा कि पुस्तक पर चर्चा रखी जाती है| पुस्तक का पीडीएफ उपलब्ध होने पर पुनः चर्चा रखेंगे।
डॉ. तीरथ सिंह खरबंदा ने बड़ी सोच के साथ व्यंग्य लिखने पर जोर दिया, तो ललिता जोशी ने व्यंग्यधारा समूह के कार्यक्रमों से लेखकों के ज्ञान-संवर्धन और उत्साहवर्धन को रेखांकित किया।
प्रखर व्यंग्य आलोचक डॉ. रमेश तिवारी (नई दिल्ली) ने कहा कि व्यंग्यधारा समूह ईमानदारी और श्रमपूर्वक काम कर रहा है। समर्पित भाव से काम करने वालों का नोटिस भी लिया जा रहा है। व्यंग्यधारा का उद्देश्य है कि सभी साथी व्यंग्य दृष्टि से समृद्ध हो। चर्चा में सुधीर कुमार चौधरी (इंदौर), रेणु देवपुरा (उदयपुर), प्रभात गोस्वामी (जयपुर), अनूप शुक्ल (शाहजहांपुर), अभिजीत कुमार दुबे (अगरतला) अलका त्रिपाठी ने भी हिस्सा लिया। विमर्श गोष्ठी का संचालन श्री रमेश सैनी और आभार विवेक रंजन श्रीवास्तव (जबलपुर) ने व्यक्त किया|
गोष्ठी में सर्वश्री डा. महेन्द्र कुमार ठाकुर (रायपुर) किशोर अग्रवाल (रायपुर), प्रभाशंकर उपाध्याय (सवाई माधोपुर), बलदेव त्रिपाठी (लखनऊ), जयप्रकाश पाण्डेय (जबलपुर), रामकिशोर फिरोदा, टीकाराम साहू ‘आजाद’ (नागपुर), सूर्यदीप कुशवाहा, डॉ सुरेश कुमार मिश्र ‘उरतृप्त' (तेलंगाना), किशोर अग्रवाल (रायपुर),राकेश सोहम (जबलपुर) सौन्दर्य मिश्र,सौरभ तिवारी (नई दिल्ली) आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
